जानकारी मिलेगी,जान की सुरक्षा नहीं

Image caption भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाना आसान नहीं है

सूचना के अधिकार क़ानून के कार्यकर्ता अमित जेठवा की गुजरात के अहमदाबाद में हुई हत्या से ये सवाल फिर उठा है कि क्या ज़मीनी स्तर पर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ आवाज़ उठाना जान पर भारी पड सकता है.

बिहार के जनजाग्रति शक्ति संगठन के रणजीत पासवान अपना अनुभव बताते हुए कहते है, "गाँव का जो दबंग व्यक्ति होता है, वो हमें काम करने से रोकता है. एक बार तो गाँव प्रमुख और उप-प्रमुख समेत हमें छह घन्टे तक, कमरे में बंद रखा गया और फिर हमने पाँव पकड कर छुटकारा पाया. "

रणजीत पासवान अकेले नहीं है, ज़मीनी स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाले अधिकतर कार्यकर्ताओं को इस तरह का परिस्थितियों से हर दिन दो-चार होना पडता है.

इस तरह की स्थिती ही चुनौती नहीं है प्रशासन का रवैया भी एक बडी चुनौती है. रणजीत पासवान कहते है, "प्रशासन से ही हम पर दबाव पडता है, जब हम काम करते है तो प्रशासन का ही मुद्दा निकल कर बाहर आता है. जब प्रशासन का मुद्दा उछलता है तो प्रशासन ही प्रतिनिधि को कहता है कि हम पर दबाव बनाए "

रणजीत पासवान की आप-बीती एक बडी समस्या का नमूना भर है.

भारत के मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह भी स्वीकार करते है कि सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करने वाले को धमकियाँ मिलतीं हैं. हालाकि वो कहते है कि इनकी संख्या काफी कम है.

वजाहत हबीबुल्लाह कहते है " मै ये मानने के लिए तैयार नहीं हूं कि लगातार इस प्रकार की चीजे़ होती है. कई हज़ार मामलों की सुनवाई के दौरान दो-चार मामले ही आए है, एक मामले में तो जान को खतरा भी था, और उसे हमने पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध करवाई थी."

कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या के मामले में वजाहत हबीबुल्लाह ने कहा, "गुजरात पुलिस इस मामले में तुरंत कार्रवाई करे और जो इसके लिए ज़िम्मेदार है उसे तुरंत न्यायालय के सामने पेश किया जाए."

सूचना के अधिकार क़ानून के तहत जानकारी माँगने वालों के लिए अलग से सुरक्षा का कोई प्रावधान नहीं है.

सूचना के अधिकार को क़ानून बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाले सामजिक कार्यकर्ता और मैगसेसे पुरस्कार प्राप्त कर चुके अरविंद केजरीवाल कहते हैं, "सूचना के अधिकार क़ानून में ये अलग से प्रावधान करने की जरुरत नहीं है. आईपीसी और सीआरपीसी पहले से ही मौजूद हैं, जो पुलिस को जिम्मेदारी देते हैं कि वो नागरिको की सुरक्षा करे. "

अरविंद केजरीवाल कहते है, "अगर नया क़ानून भी बनाया जाए तो भी उसे लागू तो पुलिस ही करेगी और पुलिस भ्रष्ट हो चुकी है. पुलिस ग़लत ताक़तों के साथ मिलकार काम करती है."

वह कहते है, "ये सिर्फ़ एक सूचना के क़ानून के कार्यकर्ता की हत्या नहीं है, ये देश के हर नागरिक की बात है, जो भी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा, सत्येन्द्र दुबे को मारा गया, मंजुनाथ को मारा गया."

अरविंद केजरीवाल कहते है कि देश में एक भी संस्था नहीं हैं, जिसके सामने आप बेफ़िक्र होकर भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सकें.

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