क्या हिंदी बदल रही है?

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IST

IST 2021- प्रभु मिश्र एक अख़बार से हवाला देते हुए बताते हैं कि कैसे हिंदी अख़बारों में अंग्रेज़ी का इस्तेमाल हो रहा है. वे मानते हैं कि ये औपनिवेशिक दवाब है.

IST 2020- प्रभु मिश्र बहस में दोबारा शामिल  हुए हैं, वे कहते हैं कि थोड़ी बहुत हिंदी में मिलावट तो ठीक है लेकिन पूरी भाषा को नहीं बदला जा सकता.

IST 2019 -जोधपुर से एक और श्रोता जुड़े हैं. वे कहते हैं कि न चाहते हुए कि हिंदी में अंग्रेज़ी का इस्तेमाल हो जाता है.

IST 2018- शब्बीर खन्ना बीबीसी से काफ़ी नाराज़ है कि बीबीसी हिंदी ने भी हिंदी को दरकिनार कर दिया है.

IST 2017- संडे के संडे क्या होता है- शब्बीर सवाल उठा रहे हैं

IST 2016- राजेश जोशी बहस को आगे बढ़ाते हुए शब्बीर खन्ना से बात कर रहे हैं जो सऊदी अरब से फ़ोन लाइन पर हैं. वे बीबीसी के पुराने श्रोता हैं. शब्बीर कहते हैं कि बीबीसी को ये बहस कराने का हक़ ही नहीं है. बीबीसी के कार्यक्रम का नाम बीबीसी इंडिया बोल. भारत क्यों नहीं

IST 2015- आलोक मिश्रा प्रभु का जवाब दे रहे हैं और दोनों के बीच वाद विवाद चल रहा है

IST 2013- प्रभु मिश्रा का तर्क है कि मीडियाकर्मी भाषा को लेकर गंभीर नहीं है.

IST 2011- नौएडा से आलोक मिश्रा  अख़ाबर में काम करते हैं, वे कहते हैं कि हिंदी का स्वरूप बदलना क्रमिक प्रकिया है, इसे हम और आप रोक नहीं सकते. कुछ शब्द अंग्रेज़ी के हैं जो चलन में है और लोग उन्हें इस्तेमाल करते हैं. अंग्रेज़ी अपने आप हमारी जीवन में शामिल हो गए हैं.

IST 2009- हिसार से राजकिशोर कार्यक्रम में शामिल हुए हैं. वे मानते हैं कि हिंदी को कोई खतरा नहीं, युवा पीढ़ी फ़ैशन के लिए अंग्रेज़ी बोलते हैं

IST 2005- बीबीसी इंडिया बोल कार्यक्रम लेकर स्टूडियो में हैं राजेश जोशी

 IST 2005 - लाइव टेक्सट के ज़रिए मैं वंदना आपके साथ रहूंगी. कार्यक्रम में लाइव हिस्सा लेने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-11-7000 पर कॉल करें

IST 2002- इस बार चर्चा का विषय है कि क्या हिंदी का स्वरूप बदल गया है?

IST 2000-- बीबीसी हिंदी के लाइवटेक्सट में आपका स्वागत है.

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