राजीव गांधी के फ़ोन रिकॉर्ड्स नहीं

Bhopal Gas Tragedy
Image caption वॉरेन एंडरसन को पहले गिरफ़्तार किया गया फिर भारत से बाहर भेज दिया गया था.

भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वॉरेन एंडरसन कैसे भारत से गए, इस पर कई तरह की अटकलें हैं. सरकार और विपक्ष इस पर अलग-अलग तथ्य सामने रखते हैं.

इस बीच सूचना के अधिकार (आरटीआई) के ज़रिए इस बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई है.

आरटीआई के ज़रिए प्रधानमंत्री कार्यालय(पीएमओ) से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के फ़ोन रिकॉर्ड्स का ब्यौरा मांगा गया.

फोन रिकॉर्ड्स के ज़रिए ये जानकारी मिल सकती है कि गैस त्रासदी के बाद राजीव गांधी ने किस-किस से बातचीत की.

जवाब

इस आरटीआई के जवाब में पीएमओ ने कहा है उसके पास कोई जानकारी नहीं कि राजीव गांधी ने इस हादसे के बाद किससे बात की.

गौरतलब है कि 1984 में भोपाल गैस त्रासदी में 15,000 से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

केंद्रीय जनसूचना अधिकारी संयुक्ता रे ने अपने जवाब में लिखा है ''आवेदक ने ये जानना चाहा कि दिसंबर 1984 के कुछ खास दिनों के बीच प्रधानमंत्री ने किसे फ़ोन किया और किसका फ़ोन उन्हें मिला. इस आरटीआई पर हमने पीएमओ से जवाब मांगा. कार्यालय से हमें जवाब मिला है कि उसके पास इस तरह की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं.

एक सूचना आयुक्त ने इस बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि पीएमओ ने अपने जवाब में ये नहीं कहा है कि वो इस तरह की जानकारियाँ नहीं रखता.

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