संसद में महँगाई को उठाएगा विपक्ष

सोमवार से शुरू हो रहा संसद का मॉनसून सत्र हंगामेदार होने की उम्मीद की जा रही है.

विपक्ष महँगाई, भोपाल त्रासदी, भारत-पाक वार्ता, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार और राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में देरी जैसे मुद्दों को जोरशोर से उठाने की तैयारी में है तो दूसरी ओर सरकार ‘हिंदू चरमपंथ’ और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों को उठाकर विपक्षी एकता को मुश्किल में डाल सकती है.

सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी जिसमें विपक्षी दलों ने अपने इरादे स्पष्ट कर दिए.

सोमवार को संसद के दोनों सदन अपने दिवंगत सदस्यों राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के वीरेंद्र भाटिया और लोकसभा में निर्दलीय दिग्विजय सिंह को श्रद्धांजलि देकर स्थगित हो जाएंगे.

इसलिए विपक्ष ने मंगलवार को महंगाई के मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लाने का फ़ैसला किया है.

अमित शाह का मामला

गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह के मामले में सीबीआई के दुरुपयोग को मुद्दे पर भाजपा को अन्य विपक्षी दलों का समर्थन न मिलने के बारे में पूछे जाने पर सुषमा स्वराज ने कहा सीबीआई के दुरुपयोग की बात से किसी ने मना नहीं किया है. इस बात पर सभी विपक्षी दल सहमत हैं कि सीबीआई का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है और सभी दलों को इसका निशाना बनाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से मतविभाजन के प्रावधान के तहत सदन में भोपाल गैस त्रासदी के विषय को उठाया जाएगा.

सुषमा स्वराज का कहना था कि भाजपा की माँग है कि पीड़ितों को उचित मुआवज़ा मिले.

भाजपा की नेता ने कहा कि बेकाबू महंगाई पर सरकार के दो प्रमुख सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक भी विपक्ष के साथ हैं.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता गुरदास दासगुप्ता का कहना था कि असली मुद्दा महंगाई है. राजनीतिक दलों के खिलाफ सीबीआई के दुरुपयोग का मुद्दा सामान्य मुद्दा है और इससे वो सहमत हैं. लेकिन गुजरात मामले में सीबीआई की जांच का विषय अलग है.

उनका कहना था कि गुजरात मामले में क़ानून को काम करने दिया जाना चाहिए.

गुरदास दासगुप्ता ने कहा,''आवश्यक वस्तुओं और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के साथ पेट्रोल के मूल्य को नियंत्रण मुक्त करने के विषय को संसद में जोरशोर से उठाया जाएगा और इस विषय पर विपक्ष की ओर से कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया जाएगा.''

विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि अगर सरकार इन विषयों पर चर्चा कराने को तैयार होगी तो सदन की कार्यवाही में पूरा सहयोग करेंगे.

प्रेक्षकों का कहना है कि सरकार इन विषयों पर विपक्ष को बहुत ज्यादा बोलने का मौक़ा देना नहीं चाहेगी.

गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह की गिरफ़्तारी और महिला आरक्षण विधेयक जैसे मुद्दे सरकार के पास हैं, लेकिन ये कितना प्रभावी होंगे, ये कहना मुश्किल है.

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