कश्मीर में हुई मौतों के लिए जांच आयोग

कश्मीर में पत्थर फ़ेंकते युवा
Image caption इस वर्ष जून में शुरु हुई हिंसा के बाद घाटी में 17 लोगों की मौत हुई है.

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर राज्य की सरकार ने हाल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों की मौत की जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है.

ये आयोग घाटी में दो जून से शुरु हुए प्रदर्शनों में 17 लोगों की मौत का जांच करेगा.

एक सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि निर्णय मंगलवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया.

प्रवक्ता ने कहा कि आयोग की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत जज जस्टिस बशीरुद्दीन करेंगे. एक अन्य रिटायर जज वाईपी नारगोत्रा इस आयोग के सदस्य होंगे.

प्रवक्ता ने कहा, “जांच उन 17 घटनाओं की पड़ताल करेगी जो राज्य पुलिस या सुरक्षा बलों के कारण घातक सिद्ध हुईं हैं.”

ये आयोग तीन महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगा.

राज्य कैबिनेट ने मृतकों के परिवार के लिए एक लाख रुपए की राहत राशि का भी ऐलान किया और साथ ही हर मृतक के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भी फ़ैसला किया है.

जून में इन प्रदर्शनों जान गंवाने वाले तुफ़ेल अहमद के पिता मोहम्मद अशरफ़ ने जांच आयोग के गठन और राहत राशि दोनों को ही ख़ारिज कर दिया है.

मोहम्मद अशरफ़ ने कहा कि उन्हें सरकारी जांच पर कोई यक़ीन नहीं है, “मैं किसी ग़ैर-भारतीय जज द्वारा जांच चाहता हूं.”

राहत राशि को अस्वीकार करते हुए अशरफ़ ने कहा, “ अगर वे मुझे सारी दुनिया भी देना चाहें तब भी मैं उसे स्वीकार नहीं करुंगा.”

जानकारों का मानना है कि सरकारी फ़ैसलों से घाटी के आम लोगों का गुस्सा शायद ही ठंडा हो. हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक जून के बाद से हुई 17 मौतों की जांच के लिए आयोग का गठन करने का सुझाव दिया गया था.

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