नवी मुंबई में हवाई अड्डा पर उठे सवाल

नवी मुंबई में प्रस्तावित हवाई अड्डा
Image caption नवी मुंबई में प्रस्तावित हवाई अड्डा को लेकर विवाद चल रहा है

सांताक्रूज़ हवाईअड्ड़े पर भीड़ की वजह से मुंबई में वर्षों से एक और हवाईअड्डे की कल्पना की जा रही है, लेकिन नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल की मानें तो हवाईअड्डे को हरी झंडी मिलने में देरी हो रही है.

पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश देरी से इंकार करते हैं. उधर पर्यावरण के अलावा विस्थापित लोगों के भविष्य को लेकर भी हवाईअड्डे की आलोचना हो रही है.

हाल ही में खबरें आईं कि पर्यावरण मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार की संस्था सिडको (सिटी और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन ऑफ़ महाराष्ट्र) से कहा है कि वो हवाईअड्डे के लिए वैकल्पिक जगह की तलाश करे. नए हवाईअड्डे में सिडको की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी.

इसी मुद्दे पर एक संवाददाता सम्मेलन में प्रफुल्ल पटेल बिफर पड़े. उन्होंने कहा, "ये कह देना कि आप यहाँ से वहाँ जगह देख लीजिए, ये आसान नहीं है. जो जगह हमने चुनी है वो आखिरी जगह है जिसे भारत सरकार की भी अनुमति मिल चुकी है. इसलिए जगह बदलने का तो कोई सवाल ही नहीं है. पर्यावरण मंत्रालय को इसे जल्द ही निपटा लेना चाहिए, नहीं तो मुंबई और महाराष्ट्र दोनों का ही नुकसान होगा."

प्रफुल्ल पटेल ने ये चेतावनी भी दे डाली कि बढ़ते दबाव के चलते सांताक्रूज़ हवाईअड्डे से नए विमान का उड़ना औऱ उतरना भी बंद किया जा सकता है.

नवी मुंबई में 1140 हेक्टेयर में फैले इस प्रस्तावित हवाईअड्डे की परिकल्पना महानगर में बढ़ती भीड़ की वजह से की गई थी. एक अनुमान लगाया गया था कि अगर ये हवाईअड्ड़ा बना तो अपने पहले साल यानि 2012 में ये एक करोड़ यात्रियों का बोझ उठा पाएगा, लेकिन अभी यानि अगस्त 2010 में ये भी नहीं साफ़ है कि ये हवाईअड्ड़ा बनेगा भी या नहीं. महाराष्ट्र की कांग्रेस एनसीपी सरकार इस हवाईअड्ड़े की पक्षधर है.

कई सर्वेक्षणों और बैठकों के बाद 21-22 जुलाई को पर्यावरण मंत्रालय की एक बैठक हुई. सिडको के मैनेजिंग डॉयरेक्टर तानाजी सात्रे के मुताबिक सिडको से वैकल्पिक स्थानों की तुलना नवी मुंबई की जगह से करने को कहा गया है.

यानि कयास लग रहे हैं कि नवी मुंबई में वर्षों से हवाईअड्ड़े के लिए ज़मीन अधिग्रहण के काम में जुटी सिडको को क्या ये काम किसी और जगह दोबारा शुरू करना होगा? अगर ऐसा होता है तो इस परियोजना में और देरी होगी.

नाराज पर्यावरणविद

हवाईअड्डे को लेकर पर्यावरणविदों में नाराज़गी है क्योंकि ऐसा करने पर कई एकड़ में फ़ैले मैनग्रोव्स तो तबाह होंगे ही, नदियों के रास्तों को भी बदलना होगा.

लोग वर्ष 2005 में मुंबई में आई भयानक बाढ़ से मची तबाही को भूले नहीं हैं जिसके लिए वो मिठी नदी के रास्ते से की गई छेड़छाड़ को ज़िम्मेदार मानते हैं.

पर्यावरणविद् गिरीश राउत कहते हैं, "हवाईअड्डे की जगह के लिए दो नदियों को भरना होगा, जबकि तीन नदियों के रास्ते को बदलना होगा. कुछ पहाड़ों को भी हटाना होगा. एकड़ों में फैले मैनग्रोव्स को खत्म करना होगा. इससे वहाँ की जैव-विविधता, फ्लैमिंगो पक्षियों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. मिठी नदी में करीब 80 करोड़ लीटर के रासायनिक पदार्थों मिलते हैं उनमें से ज़्यादातर कचरा सांताक्रूज़ और सहर हवाईअड्ड़ों का होता है."

साथ ही सवाल विस्थापित 11 गाँव में रहने वाले लोगों का भी है जो खेती के अलावा मछली पकड़ने जैसे काम से जुड़े हैं. गाँव में रहने वाले गोपी म्हात्रे आरोप लगाते हैं कि उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.

वो कहते हैं, "हमें एक पैसा भी नहीं मिला है, सिर्फ़ एक नोटिस दिया है. हमारा दूध का कारोबार, मछली का काम सब बंद होने वाला है. हमारा घर, तालाब, मंदिर, सभी सरकार ने ले लिया है. हमारे पास तो संडास जाने के लिए भी ज़मीन नहीं है. यहाँ पर किसी को एक नौकरी भी नहीं दी गई है."

सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के लिए गाँव वालों ने एक कमेटी बनाई है. कमेटी प्रमुख पंढरीनाथ केणी कहते हैं कि हवाईअड्डे को बनाने से पहले सरकार को उनके पुनर्स्थापन के बारे में सोचना चाहिए, नहीं तो वो हवाईअड्डा नहीं बनने देंगे.

उधर उद्योगों के समूह फिक्की की वैजयंती पंडित हवाईअड्डे की वकालत करती हैं, लेकिन वो दूसरी जगह को लेकर सोचविचार की भी सलाह देती हैं.

बहरहाल तानाजी सात्रे कहते हैं कि विस्थापित लोगों को दोबारा स्थापित करने के लिए लोगों से चल रही बातचीत आखिरी चरणों में है. उनका कहना है कि सिडको की बातचीत उन सभी लोगों से हुई है जो इस हवाईअड्डे के बनने से विस्थापित हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, "हमने इन लोगों से हुई बातचीत के बाद एक योजना बनाई है और ये आखिरी चरणों में है. लोगों को पता है कि उन्हें कहाँ बसाया जाएगा."

तानाजी सात्रे प्रस्तावित हवाईअड्डे के लिए बनने वाली नई कंपनी में लोगों को हिस्सेदारी देने की भी बात करते हैं. हालांकि लोगों को इन वायदों पर बहुत भरोसा नहीं है.

सात्रे के मुताबिक नदियों के मार्ग को बदलने से कोई फर्क नहीं आएगा और इस बारे में अध्ययन किए जा चुके हैं. वो मैनग्रोव्स को नई जगहों पर ले जाने की भी बात करते हैं लेकिन पर्यावरणविदों के मुताबिक ये इतना आसान नहीं है.

नवी मुंबई हवाईअड्ड़ा बनता है या नहीं इस पर सवाल बरकरार है. सभी को जवाब में दिलचस्पी होगी क्योंकि इसका असर हज़ारों लोगों की ज़िंदगी पर पड़ेगा. विकास के मायने और तरीकों पर भी चल रही बहस में फिलहाल और तेज़ी आएगी.

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