मुठभेड़ में पाँच माओवादियों की मौत

नक्सली
Image caption नक्सली अक्सर बड़ी संख्या में आकर हमले करते हैं

छत्तीसगढ़ में पुलिस के विशेष दल (एसटीएफ़) के सौ जवानों के माओवादियों हमले में फँस जाने के ख़बरों के बाद बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) ने कहा है कि सभी जवान सुरक्षित हैं.

उनका कहना है कि मुठभेड़ में पाँच माओवादी मारे गए हैं.

हालांकि पुलिस की ओर से कोई शव बरामद होने की कोई बात नहीं कही गई है.

घने जंगलों में गश्त के लिए निकले इन जवानों के माओवादियों के बीच फँस जाने की ख़बर आई थी और राज्य के पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि जवानों से न तो वायरलेस से संपर्क हो पा रहा है और न सैटेलाइट फ़ोन से.

माओवादियों के गढ़ माने जाने वाले इलाक़ों में हेलीकॉप्टर भी नहीं पहुँच पा रहे थे.

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वहाँ मुठभेड़ अभी भी जारी है.

सुरक्षित

अधिकारियों के अनुसार किरंदुल थाने से जवान बुधवार को सुबह गश्त के लिए निकले थे.

उनके अनुसार एसटीएफ़ के ये जवान बचेली क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय खनिज विकास निगम की खदानों के पास गश्त लगा रहे थे.

इस बीच ख़बर मिली थी कि वहाँ बड़ी संख्या में माओवादियों ने इस गश्ती दल को घेर लिया था और बहुत समय तक वहाँ मुठभेड़ की ख़बरें आ रही थीं.

ख़राब मौसम के कारण हेलिकाप्टर घटनास्थल पर फँसे जवानों की मदद के लिए पहुँच नहीं पा रहे थे. बाद में उनकी सहायता के लिए दंतेवाड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसआरपी कल्लूरी के नेतृत्व में पुलिस की एक बटालियन घटनास्थल की ओर रवाना हुई थी.

लेकिन अब बस्तर के आईजी टीजे लॉन्गकुमर ने बीबीसी से कहा है कि गश्त पर निकले सभी जवान सुरक्षित हैं.

उनका कहना है कि मुठभेड़ में पाँच माओवादियों की मौत हुई है.

बारूदी सुरंगों का जाल

जिस जगह पर मुठभेड़ की ख़बरें आ रही थीं वह पहाड़ी और जंगल का इलाक़ा है.

जहाँ राष्ट्रीय खनिज विकास निगम की खदानें स्थित हैं. विशेषज्ञों के अनुसार माओवादी अकसर पहाड़ियों पर मोर्चा बनाकर आसपास सुरक्षा बलों पर हमला करते हैं.

माना जाता है कि दंतेवाड़ा से बचेली की सड़क में अनेक जगहों पर माओवादियों ने बारूदी सुरंगें लगाई हुई हैं और वहाँ पहुँचना आसान काम नहीं है.

पिछले डेढ़ महीने में सुरक्षा बलों ने माओवाद प्रभावित विभिन्न इलाक़ों कार्रवाई तेज़ की है और इसके जवाब में माओवादियों ने भी हिंसक कार्रवाइयाँ की हैं.

पिछले महीने दो तारीख़ को आंध्र प्रदेश की पुलिस ने वरिष्ठ माओवादी नेता राजकुमार आज़ाद को आदिलाबाद में 'मुठभेड़' में मार दिया था. लेकिन माओवादियों ने इसे फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताते हुए कहा था कि पुलिस ने उन्हें नागपुर से पकड़ा था.

तेरह जुलाई को छत्तीसगढ़ में ही छह माओवादी पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे.

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