बिहार ने मांगा 5000 करोड़ का राहत पैकेज

धान की रोपाई
Image caption बिहार सरकार ने राज्य के 38 में से 28 ज़िलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है.

बिहार सरकार ने राज्य में सूखे से निपटने के लिए केंद्र सरकार से 5,000 करोड़ के राहत पैकेज की मांग की है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को प्रधानमंत्री से मिलेंगे.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने बिहार राज्य के 28 सूखाग्रस्त ज़िलों में राहत कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी भेजने को कहा था.

राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी मिश्र ने बीबीसी को बताया कि शुक्रवार शाम राहत पैकेज की माँग को लेकर एक ज्ञापन (मेमोरैंडम) केंद्र सरकार और कृषि मंत्रालय को देने के लिए रवाना कर दिया गया है.

बिहार सरकार की तरफ़ से जो ज्ञापन भेजा गया है उसके बारे में शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने वाले हैं.

व्यासजी मिश्र ने कहा है कि 1900 करोड़ रुपए की जो राशि केंद्र सरकार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बिहार को देनी है उसे बिना देर किए राज्य सरकार के पास भेजा जाना चाहिए. अगर ये राशि तुरंत मिल जाती है तो सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के तहत मज़दूरों को आर्थिक सहायता मिल सकेगी.

दरअसल केंद्र सरकार ने कहा था कि विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही वो केंद्रीय टीम बिहार में सूखे की स्थिति का जायज़ा लेने भेजेगी.

केंद्र सरकार से पत्र मिलने के बाद से राज्य का आपदा प्रबंधन विभाग इसकी तैयारी में जुटा हुआ था.

कम बारिश

आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव व्यासजी मिश्र ने बीबीसी को बताया,'' एक जून से 31 जुलाई तक बिहार में औसत बारिश सामान्य से 23 फ़ीसदी कम हुई है.''

उन्होंने बताया,'' बारिश कम होने से धान की बुआई भी बहुत कम हुई है. इसे देखते हुए सरकार को राज्य के 38 में से 28 ज़िलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है.''

उन्होंने कहा कि जिन 10 ज़िलों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है उनकी भी हालत बहुत ठीक नहीं है. इनमें ज़रूरत से कम बारिश हुई है और धान की बुआई भी पूरी तरह नहीं हो पाई है.इन 10 ज़िलों को भी सूखाग्रस्त ज़िलों की सूची में शामिल किया जा सकता है.

इसे देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि संबंधित ज़िलाधिकारियों की रिपोर्ट मिलने के बाद इन 10 ज़िलों को भी सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है.

राजनीति

इस बीच यहाँ के राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि नीतीश सरकार प्राकृतिक आपदा के बहाने केंद्र की काग्रेस नीत सरकार को 'बिहार विरोधी' बताने के लिए आर्थिक मदद के रूप में भारी धनराशि माँग सकती है.

इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि अगर माँगी गई रक़म में से केंद्र सरकार कटौती कर देती है तो विधानसभा चुनाव में नीतीश इसे कांग्रेस के ख़िलाफ़ एक चुनावी मुद्दा बना सकते हैं.

वहीं केंद्र सरकार भी सूखा पीड़ित लोगों के विरोध से बचने और नीतीश सरकार को इस बाबत कोई राजनीतिक लाभ न लेने देने की रणनीति के तहत राज्य सरकार से शीघ्र जानकारी लेकर केंद्रीय टीम भेजने में तत्परता दिखा रही है.

राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान ने पूरे बिहार को सूखाग्रस्त घोषित कर तुरंत राहत कार्य शुरू करने की मांग की है.

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