बातचीत ही समस्या का हल:चिदंबरम

कश्मीर में हिंसा
Image caption पिछले हफ़्ते से तेज़ हुई हिंसा में अब तक तीस से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर की समस्या का हल सिर्फ़ बातचीत से ही निकाला जा सकता है और इसके लिए सरकार भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों का दिल जीतने का हर संभव प्रयास करेगी.

चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर की ताज़ा स्थिति पर दिए गए अपने बयान पर विभिन्न सदस्यों की तरफ़ से मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब देते हुए शुक्रवार को राज्य सभा में ये बातें कहीं.

चिदंबरम ने कहा कि इस समय सबसे ज़रुरी बात ये है कि कश्मीर में शांति बहाल की जाए.

उल्लेखनीय है कि पिछले दो महीनों में भारत प्रशासित कश्मीर में हालात फिर से बिगड़े हैं और लोग नाराज़गी ज़ाहिर करने के लिए बार-बार सड़कों पर निकल रहे हैं.

पिछले एक हफ़्ते में हालात और ज़्यादा बिगड़े हैं और हिंसक प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा बलों की गोलियों से 30 लोगों की मौत हो चुकी हैं और बहुत से लोग घायल हुए हैं.

इस उथल पुथल के बीच राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि इस राजनीतिक समस्या का राजनीतिक हल ही निकाला जाना चाहिए जबकि विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या उमर अब्दुल्ला समस्या से निपटने में सक्षम हैं.

विशेष दर्जे पर सवाल

चिदंबरम ने कहा कि ये सबसे ज़रुरी है कि सरकार लोगों से किए गए अपने वादों को पूरा करे.

सरकार ने जिन मुद्दों पर विचार करने का वादा किया है उनमें से एक विवादास्पद सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून है.

गृह मंत्री ने कहा कि वो इस मामले में दूसरे लोगों की राय को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते लेकिन फिर भी उनकी कोशिश होगी कि सब लोगों से विचार-विमर्श कर इसका कोई हल निकाला जा सके ताकि सरकार अपना वादा पूरा कर सके.

घाटी में मौजूद सुरक्षाकर्मियों के बारे में चिदंबरम ने कहा, "अगर हालात सुधरते हैं तो सरकार सेना की तादाद में कटौती करना चाहेगी लेकिन ज़रुरत पड़ने पर ज़्यादा सेना भी भेजी जाएगी, यही केंद्र सरकार की नीति है."

उन्होंने कहा कि बातचीत ही इस समस्या का समाधान है.''जम्मू-कश्मीर की समस्या का समाधान सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक प्रक्रिया और कश्मीर के विभिन्न वर्ग के लोगों से बातचीत के ज़रिए संभव है."

गृहमंत्री ने कहा, "कल ही हमें ख़बर मिली है कि जम्मू-कश्मीर का एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलना चाहता है. मुझे ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि प्रधांनमंत्री उनसे मिलने के लिए राज़ी हो गए हैं और संभवत: सोमवार को ये मुलाक़ात होगी.''

हुर्रियत कांफ्रेंस गिलानी गुट के नेता सैयद अली शाह गिलानी के हाल में दिए गए बयान का स्वागत करते हुए चिदंबरम ने कहा कि उन्हें बहुत ख़ुशी होगी अगर सैयद अली शाह गिलानी भी जम्मू-कश्मीर से आने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल हों.

गिलानी ने दो दिन पहले बयान जारी कर लोगों से शांति क़ायम करने की अपील की थी.

गृह मंत्री ने कहा, "हो सकता है कि पाकिस्तान ने घाटी में अशांति फैलाने की अपनी रणनीति में बदलाव किया हो और वो अब नागरिक अशांति का सहारा ले रहा है लेकिन अगर भारत कश्मीर के लोगों का दिलो दिमाग़ जीतने में कामयाब हो जाता है तो पाकिस्तान की ये साज़िश भी असफल हो जाएगी."

इससे पहले राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार को ऐसे संवेदनशील समय में राज्य के लिए कोई राजनीतिक पैकेज की घोषणा नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसके विपरीत प्रभाव पड़ सकते हैं.

सरकार की कश्मीर नीति की आलोचना करते हुए जेटली ने कहा, ''हमें इस बात पर भी विचार करने की जरूरत है कि जम्मू-कश्मीर को जो विशेष दर्जा दिया गया, उससे हमें क्या हासिल हुआ.''

माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाकर नहीं, बल्कि इसे प्रभावी तरीके से लागू कर स्थिति बेहतर की जा सकती है.

उन्होंने जम्मू-कश्मीर में संसदीय दल भेजे जाने के सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य में विश्वास बहाल करने तथा वहां लोगों के मन में अलग-थलग पड़ जाने की भावना को दूर करने की ज़रूरत है.

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