लालगढ़ में ममता की रैली

ममता बनर्जी
Image caption ममता की रैली को माओवादियों ने भी अपना समर्थन दिया है.

पश्चिम बंगाल के लालगढ़ इलाक़े में सोमवार को रेल मंत्री ममता बनर्जी की अगुआई में तृणमूल कांग्रेस बड़ी रैली करने वाली है.

इस रैली को माओवादियों का समर्थन मिला हुआ है. जहां सीपीएम ने इस रैली की आलोचना की है वहीं ख़बरों के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने रैली से अलग रहने का फ़ैसला किया है.

हालांकि रेल मंत्री का कहना है कि संत्रास विरोधी मंच के बैनर तले हो रही यह रैली राजनीतिक नहीं है. ममता ने कहा है कि रैली में तृणमूल के झंडे बैनर भी नहीं होंगे लेकिन इलाक़े में पहले ही पार्टी के झंडे बैनरों की भरमार हो चुकी है.

ममता बनर्जी का कहना है कि लालगढ़ में नक्सलवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के नाम पर राज्य सरकार ने स्वाभाविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ख़त्म कर दिया है और यह रैली इसी के विरोध में है.

प्रकाश कराट ने कहा कि तृणमूल माओवादियों के साथ मिलकर रैली कर रही है और हम जानना चाहेंगे कि इस पर केंद्र सरकार का क्या रुख है.

ममता की इस रैली को पीसीपीए ने अपना समर्थन दिया है जबकि पूर्व में माओवादी नेता किशनजी ने भी कहा था कि वो रैली को शांतपूर्ण तरीके से आयोजित होने देंगे.

जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ समय में लालगढ़ इलाक़े में सुरक्षा बलों की तैनाती ने माओवादियों की शक्ति को कमज़ोर किया है. इसी कारण माओवादी रणनीतिक चाल के तहत ममता की रैली का समर्थन कर रहे हैं.

दूसरी तरफ माओवादियों और ममता के एक साथ आने से सीपीएम को केंद्र सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है और वो साफ़ कह रहे हैं कि नक्सलियों के ख़िलाफ़ सरकार की रणनीति ही विरोधाभासी है.

असल में पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले चुनावों की तैयारी अभी से शुरु हो चुकी है और ये रैलियां शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा मानी जा रही हैं.

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