क्या मतलब है आज़ादी का?

तिरंगा
Image caption भारत की स्वतंत्रता की 64वीं सालगिरह पर लोग क्या वाकई अपने आपको आज़ाद महसूस करते हैं ?

15 अगस्त को भारत की आज़ादी की 64वीं सालगिरह है. लेकिन क्या भारत के नागरिक वाकई अपने आपको आज़ाद महसूस करते हैं? स्वतंत्रता के असल मायने हैं क्या?

बीबीसी ने ये सवाल कई जानी-मानी हस्तियों के अलावा आम लोगों से भी पूछा.

सूचना के अधिकार के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाले अरविंद केजरीवाल चाहते हैं कि सही मायनों में आज़ादी के लिए भारत से अफ़सरशाही ख़त्म होनी चाहिए.

वो कहते हैं "सूचना के अधिकार से हमें सिर्फ़ सवाल पूछने का अधिकार मिला है. सरकारी फ़ैसलों से हमें आज़ादी नहीं मिली है. हमें ऐसा लोकतंत्र चाहिए जिसमें रोज़ाना जनता का दखल हो. ये पांच साल वाला जनतंत्र हमें नहीं चाहिए."

नीलम कटारा को भारत की क़ानून व्यवस्था से शिकायत है.

वर्ष 2002 में उनके बेटे नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी. हत्या के आरोपियों विकास और विशाल यादव को सज़ा दिलाने के लिए नीलम को लंबी क़ानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी.

नीलम कहती हैं "जब आपको इंसाफ़ के लिए लड़ाई लड़नी पड़े, मतलब आपको सही मायनों में आज़ादी नहीं मिली है. पैसे वाले आरोपी अपने रसूख़ के बल पर क़ानूनी प्रक्रिया को खींचते रहते हैं. जब तक देश में भय का माहौल रहेगा, हम आज़ाद नहीं कहलाएंगे."

भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मानती हैं. उनका मानना है कि ख़ाप पंचायतें नौजवानों के मन में दहशत भर रही हैं.

किरण बेदी कहती हैं, "आज़ादी का मतलब है मैं बिना डरे कहीं भी घूम सकूं, मर्ज़ी से अपना जीवनसाथी चुन सकूं. ऑनर किलिंग जैसी घटनाएं युवाओं को डरा देती हैं. मानसिकता को ग़ुलाम बना देती हैं. और डरा हुआ आदमी भला देश के किस काम आएगा?"

ऑनर किलिंग पर ही भारत की राजधानी दिल्ली के लोगों का मानना है कि ऐसी घटनाएँ देश को पाषाण युग की तरफ़ ले जा रही हैं.

पिछले साल रैगिंग में अपनी जान गंवा चुके छात्र अमन काचरू के पिता राज काचरू चाहते हैं कि छात्रों को रैगिंग से आज़ादी मिले.

उन्होंने ऐसी घटनाओं के ख़िलाफ अपने बेटे के नाम पर 'अमन मूवमेंट' शुरु किया है.

बीजिंग ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक दिला चुके मुक्केबाज़ विजेंद्र सिंह आज़ाद देश में खेलों में भ्रष्टाचार को बेहद गंभीर मुद्दा मानते हैं.

वो कहते हैं "भ्रष्टाचार की वजह से कई खिलाड़ियों को परेशान होना पड़ता है. कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं अपनाता. सब शॉर्ट कट अपनाना चाहते हैं."

विजेंद्र खेलों में पारदर्शिता और ईमानदारी चाहते हैं.

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