50 हज़ार युवाओं को नौकरियों का वादा

उमर अब्दुल्ला
Image caption उमर ने कहा कि आर्थिक पैकेज या रोजगार से घावों पर मरहम नहीं लगाया जा सकता

भारत प्रशासित कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अगले कुछ महीनों में 50,000 हज़ार युवाओं को नौकरियां देने का वादा किया है.

इसे कश्मीर के युवाओं को भारत विरोधी प्रदर्शनों से अलग करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. पिछले दो महीने से घाटी में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से यहां का जनजीवन काफ़ी अस्तव्यस्त हो गया है.

भारत के स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने 'जॉब पैकेज' की घोषणा की. उन्होंने पिछले दो महीने में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की.

उन्होंने कहा, "मेरा मन दुखी है और इस घड़ी में मैं उन परिवारों के साथ हूं जिन्होंने अपने प्रिय जनों को खो दिया है."

उन्होंने कहा कि कश्मीर में जो भी हुआ वो दुर्भाग्यपूर्ण है. इन घटनाओं में जो लोग मारे गए और जो भी लोग इससे प्रभावित हुए वो मेरे अपने हैं. ऐसी घटनाओं पर कोई भी पत्थर दिल नहीं हो सकता है.

विकास ज़रूरी

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी आर्थिक पैकेज या रोज़गार से इन घावों पर मरहम नहीं लगाया जा सकता है. हालांकि उन्होंने कहा कि राज्य का आर्थिक विकास काफ़ी ज़रूरी है और इससे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा, "अतीत में भारत सरकारी की ओर से किए गए वादों पर जम्मू-कश्मीर के लोगों को शंकाएं रही हैं. इसलिए केंद्र सरकार के लिए ज़रूरी है कि लोगों के दिमाग से आशंकाएं हटाने के लिए वह ज़रूरी क़दम उठाए और पिछले छह दशकों में पैदा हुई खाई को पाटने की कोशिश करे."

सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून (एएफ़एसपीए) पर उमर ने कहा कि वे पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने राज्य विधान सभा में यह मुद्दा उठाया.

उन्होंने कहा, "मैंने इसमें संशोधन पर जोर दिया है और मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार ने इस क़ानून पर पड़ताल की ज़रूरत महसूस की है. केंद्र सरकार से मेरी अपील है कि इस क़ानून को हटाए जाने के लिए ज़रूरी क़दम उठाए."

उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के ज़रिए लगातार समस्या खड़ी करने और पत्थरबाज़ी से किसी भी मसले का हल नहीं निकल सकता है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए लोगों से अपील की.

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