यमुना एक्सप्रेस वे का मकसद केवल सड़क नहीं

हाइवे
Image caption विपक्ष का आरोप है कि इस परियोजना से सत्ताधारी दल के लोगों को आर्थिक लाभ हो रहा है

यमुना एक्सप्रेस वे परियोजना का उद्देश्य नोएडा और आगरा के बीच बन रही नई सड़क के अगल-बगल रिहायशी कालोनियाँ, औद्योगिक नगर, होटल और हवाई अड्डा आदि बनाना है.

इस विवादास्पद परियोजना का पूरा नाम है, यमुना एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रियल अथॉरिटी. अथॉरिटी की वेबसाइट देखने से है पता चलता है कि इसका मुख्य मकसद दिल्ली–आगरा के बीच तेज रफ़्तार तीसरी सड़क बनाना नहीं है.

राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि वह किसानो की ज़मीन अधिग्रहीत करके जेपी एसोशिएट्स नामक समूह को दे रही है ताकि वह दिल्ली आगरा के बीच 165 किलोमीटर लंबी सड़क के अलावा इस क्षेत्र का औद्योगिक विकास करे.

जेपी एसोशिएट्स सड़क निर्माण एवं औद्योगिक विकास अपने खर्च से करके उसका संचालन और बिक्री करेगा.

यह अथॉरिटी रिहायशी प्लाट लगभग पांच हज़ार रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से बेच रही है, मतलब व्यावसायिक और औद्योगिक भूखंडो की क़ीमत कहीं ज्यादा होगी.

सरकार ने अब तक गौतम बुद्धनगर, महामाया नगर, मथुरा, अलीगढ़ और आगरा के 1182 गाँवों की ज़मीनों के अधिग्रहण की अधिसूचनाएं जारी की हैं. सरकार ने अधिकाँश ज़मीनों का कब्ज़ा लेकर बिल्डर को दे दिया है.

लेकिन मुआवजे की दर से किसान संतुष्ट नही हैं. करीब दस दिन पहले अलीगढ के पांच गाँवों के किसान लखनऊ आये थे. यहाँ वे मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव नेतराम से मिले.

बातचीत के बाद जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया कि अलीगढ़ के किसानों के भूमि अधिग्रहण संबंधी विवाद समाप्त हो गए हैं. सरकार की ओर से कहा गया कि इन किसानों को 425 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा के अलावा 38 रुपए प्रति वर्ग मीटर और दिया जाएगा.

सरकार ने इस इलाके के विकास, स्कूल-अस्पताल आदि बनवाने का भी आश्वासन दिया.

खेती एक मात्र आजीविका

उत्तर प्रदेश में इस समय किसानों के पास औसतन एक हेक्टर से भी कम ज़मीन है. अलीगढ़ के इन पांच गाँवों में भी अधिकांश छोटे किसान हैं. खेती ही इनकी एकमात्र आजीविका है.

सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया कि जिन किसानों की अधिकांश भूमि अधिग्रहीत कर ली गई है ऐसे किसान परिवार के एक सदस्य को जेपी इन्फ्राटेक द्वारा उन गाँवों में अधिग्रहीत भूमि पर टाउनशिप बनाने का कम शुरू होने पर उनकी योग्यता के अनुसार समायोजित किया जाएगा.

लेकिन टप्पल एवं आसपास अन्य गाँवों के किसानो ने वापस जाकर मुआवजा बढाने के लिए धरना जारी रखा. शनिवार की शाम किसानों के एक नेता राम बाबू कटेरिया को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया, जिसके बाद हुए हिंसक संघर्ष में दोनों ओर से कम से कम तीन लोग मर गए.

इसके बाद अलीगढ, मथुरा, आगरा, महामाया नगर और गौतम बुद्ध नगर चारों तरफ के किसान भी नोएडा के बराबर मुआवजे की मांग करने लगे हैं.

सरकार को डर है कि यह आंदोलन भड़का तो गंगा एक्सप्रेस वे, हिंडन एक्सप्रेस वे एवं अन्य दूसरी जगह के किसान भी मुआवाजा बढ़ाने की मांग शुरू कर देंगे तब यह आंदोलन पश्चिम से पूरब तक फैल जाएगा.

इसीलिए सरकार ने फटाफट अधिकारियों के तबादले कर न्यायिक जांच घोषित कर दी है.

सरकार इन गाँवों के किसानों का मुआवजा बढ़ाने के लिए एक समिति भी बना दी है.

लेकिन समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, लोक दल एवं अन्य विपक्षी दलों ने मायावती सरकार पर अपने ‘चहेते’ एक उद्योगपति को फ़ायदा पहुंचाने के लिए किसानों पर गोली चलवाने का आरोप लगाया है.

विपक्षी नेता यह भी आरोप लगा रहे हैं कि इस परियोजना से सत्ताधारी दल के लोगों को आर्थिक लाभ हो रहा है.

लेकिन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने एक बयान जारी करके उलटे विपक्ष पर किसानों को भड़काने का आरोप लगाया है.

मायावती ने मुलायम सिंह यादव को दादरी कांड और कांग्रेस को ऐसी ही दूसरी एसईज़ेड परियोजनाओं की याद दिलायी है.

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