बादल फटने से 18 बच्चे मारे गए

उत्तराखंड का पहाड़ी क्षेत्र (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री के अनुसार घटना बुधवार सुबह आठ बजे हुई

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में दूरदराज़ पर्वतीय ज़िले बागेश्वर के दो गांवों में बादल फटने से 18 बच्चों की मौत हो गई है और दो शिक्षक पानी में बह गए हैं. वहाँ बचाव कार्य चल रहा है और आशंका है कि और बच्चे मलबे में फँसे हो सकते हैं.

ये घटना कपकोट विधानसभा क्षेत्र के हरसिनियाबगड़ गांव की है जहाँ बुधवार सुबह बादल फटा और पानी का रेला खेत, सड़क और कई मकानों को बहाता ले गया.

पानी के तेज़ बहाव के कारण सुमगढ़ गांव में सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल की इमारत की छत गिर गई और वहां मौजूद 25 से 30 बच्चे मलबे में दब गए.

कपकोट जहाँ ये हादसा हुआ, नैनीताल से लगभग 200 किलोमीटर दूर है.

मलबा हटाने में मुश्किलें

घटनास्थल से 18 बच्चों के शव निकाले गए है जबकि छह अन्य बच्चों को जीवित निकाला गया है. घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य जारी हैं लेकिन इस समय ये स्पष्ट नहीं है कि और कितने लोग वहाँ मलबे में दबे हो सकते हैं कार्यकारी निदेशक, आपदा प्रबंधन कक्ष

उत्तराखंड के आपदा प्रंबधन कक्ष के कार्यकारी निदेश पीयूष रौतेला ने बीबीसी बताया, "घटनास्थल से 18 बच्चों के शव निकाले गए है जबकि छह अन्य बच्चों को जीवित निकाला गया है. घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य जारी हैं लेकिन इस समय ये स्पष्ट नहीं है कि और कितने लोग वहाँ मलबे में दबे हो सकते हैं."

उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री खज़ानदास ने इस हादसे के बारे में बीबीसी को बताया कि ये दुर्घटना सुबह करीब आठ बजे हुई.

उन्होंने कहा कि उस इलाक़े में बहुत ज़्यादा बारिश हो रही है जिससे मलबा हटाने में भी कठिनाई आ रही है.

भौगोलिक लिहाज़ से पहाड़ पर बसे इन गांवों तक पंहुचना कठिन है और यहां संचार और सूचना के भी सभी तंत्र ठप्प हो गए हैं जिस वजह से स्थानीय लोंगों तक पंहुचना मुश्किल है.

पिछले एक हफ्ते से उत्तराखंड के पर्वतीय इलाक़ों में विनाशकारी ढंग से बारिश हो रही है जिससे जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है और जान-माल का नुकसान हुआ है.

गंगोत्री के रास्ते में पहले ग्लेशियर फटा फिर भटवाड़ी के पास बादल फटने और भूस्खलन से पूरा कस्बा ही धंस गया है.

बद्रीनाथ धाम के रास्ते में लामबगड़ के पास बादल फटने से राष्ट्रीय राजमार्ग 150 मीटर तक बहकर अलकनंदा में समा गया है जिससे हजारों यात्री अभी तक वहाँ फँसे हैं.

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