परमाणु दायित्व रिपोर्ट पर संसद में हंगामा

भाभा परमाणु संयंत्र
Image caption परमाणु दायित्व विधेयक पर विपक्षी दलों को आपत्ति थी

भारी हंगामे के बीच विवादास्पद परमाणु दायित्व विधेयक पर स्थाई समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश कर दी गई.

हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी.

क्या है परमाणु दायित्व विधेयक

राज्यसभा में वामपंथी दलों ने इस रिपोर्ट को पेश किए जाने का भारी विरोध किया. जबकि लोक सभा में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता लालू यादव इसके विरोध में मोर्चा संभाले हुए थे.

राज्यसभा में स्थाई समिति के अध्यक्ष टी सुब्बीरामी रेड्डी ने इसे पेश किया जबकि लोकसभा में समिति के सदस्य प्रदीप टमटा ने इसे पेश किया.

बसपा सदस्यों ने इस दौरान कर्नाटक में अवैध खनन का मुद्दा उठाया और इसे लेकर दोनों सदनों में हंगामा किया.

लालू यादव का आरोप था कि कांग्रेस और भाजपा में महंगाई और परमाणु दायित्व विधेयक को लेकर सहमति बन गई है. इसके तहत गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को सोहराबुद्दीन मामले में क्वीन चिट देने की ख़बरें सामने आईं हैं.

संसद के बाहर लालू ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा के साथ सहमति बनाने में सीबीआई को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया.

इसके जवाब में भाजपा नेता वैंकया नायडू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय जनता दल, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी पार्टियां राजनीतिक सांठगांठ करती हैं, भाजपा तो लोगों के हित के लिए लड़ती है.

जवाबदेही

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार परमाणु दुर्घटना की स्थिति में मुआवज़े की राशि में तिगुनी बढ़ोत्तरी करते हुए सरकार ने इसे 500 से बढ़ा कर 1500 करोड़ रुपए तक कर दिया है.

साथ ही ये बात भी मान ली है कि परमाणु संयंत्र सरकार या सरकारी कंपनियां ही लगाएंगी, इसे निजी कंपनियां स्थापित नहीं करेंगी.

इसके पहले विपक्षी दलों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि इस विधेयक के क़ानून बनने के बाद परमाणु दुर्घटना होने की स्थिति में विदेशी कंपनियां आसानी से अपनी जवाबदेही से बच निकलेंगी.

हालांकि वाम दल अब भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं. ख़बरें हैं कि सरकार चाहती है कि नवंबर में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से पहले ये विधेयक पारित हो जाए.

संसद में इस विधेयक के पास होने के लिए भाजपा का समर्थन ज़रूरी है क्योंकि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है क्योंकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) अब भी इस विधेयक के कुछ हिस्सों को लेकर नाखुश हैं.

स्थाई समिति के अध्यक्ष सुब्बीरामी रेड्डी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' सदस्यों ने जो भी बदलाव सुझाए थे, उन पर खुलकर बातचीत की गई और इसके बाद विधेयक में ज़रूरी बदलाव किए गए हैं. ये विधेयक जनता के हित में होगा.''

मई में भारी हंगामे के बीच ये विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था. तब भाजपा ने इस विधेयक के विरोध में लोकसभा से वॉकआउट किया था.

इसके पहले मार्च में भी इस विधेयक को पेश करने की कोशिश की गई थी तब समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने इसका विरोध किया था, हालांकि मई में ये दोनों सरकार के साथ दिखाई दिए थे.

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