सोलह से पचास, पर काफ़ी नहीं...

संसद

भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सांसदों का वेतन तीन गुना करने का फ़ैसला किया है. अब हर सांसद का मूल वेतन 16 हज़ार रुपए प्रति माह से बढ़कर 50 हज़ार रुपए हो जाएगा.

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यह मुद्दा पिछले कुछ समय से इसलिए लंबित था क्योंकि मंत्रियों में इस विषय पर कुछ मतभेद थे.

लेकिन इस फ़ैसले से नाख़ुश विपक्षी दलों के सांसदों ने लोकसभा में प्रश्नकाल और फिर बाद में भी हंगामा किया है और शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही नहीं चल पाई है.

'संसद का अपमान'

सांसदों के वेतन में जो वृद्धि की गई है वह प्रस्तावित 80 हज़ार एक रुपए से कम है जो इस मुद्दे पर बनाई गई संसदीय समिति ने सुझाई थी.

समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना, अकाली दल के सांसदों ने नारे लगाए - "सांसदों का अपमान बंद करें.'

वे माँग कर रहे थे कि सरकार संसदीय समिति की सिफ़ारिशों को लागू करे.

राष्ट्रीय जनता दल के रघुवंश प्रसाद सिंह का कहना था, "सरकार का फ़ैसला संसद का अपमान है. संसदीय समिति की सिफ़ारिशों को लागू करना चाहिए."

जब लोकसभा में शोर नहीं थमा तब स्पीकर मीरा कुमार को शुक्रवार के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा.

अनेक भत्तों में वृद्धि

मंत्रिमंडल ने हर सांसद को दफ़्तर के लिए मिलने वाले ख़र्च को 20 हज़ार रुपए प्रति माह से बढ़ाकर 40 हज़ार रुपए कर दिया है.

चुनाव क्षेत्र भत्ता भी बढ़ाया गया है और इसे 20 हज़ार रुपए प्रति महीने से बढ़ाकर 40 हज़ार रुपए कर दिया गया है.

हर सांसद को मिलने वाले ब्याज मुक्त निजी कर्ज़ की राशि एक लाख रुपए से बढ़ाकर चार लाख रुपए कर दी गई है.

वाहन के इस्तेमाल के लिए जहाँ पहले प्रति किलोमीटर 13 रुपए मिलते थे, वहीं सांसद अब 16 रुपए प्रति किलोमीटर ले पाएँगे.

हर सांसद का पति या पत्नी अब पहली श्रेणी में आ जा सकेगा.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सांसदों की पेंशन में भी वृद्धि की है और अब यह आठ हज़ार रुपए प्रति माह से बढ़कर 20 हज़ार रुपए प्रति महीना हो जाएगी.

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