सांसदों के भत्ते में दस हज़ार की बढ़ोतरी

फाइल फोटो
Image caption वेतन में तीन गुने से भी ज्यादा बढ़ोतरी के बावजूद कुछ सांसद ख़ुश नहीं हैं.

भारत में सांसदो का भत्ता 10,000 रुपए और बढ़ा.

वेतन वृद्धि की मांग को लेकर अड़े सांसदो को शांत करने की कोशिश करते हुए सोमवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सांसदों के भत्तों में 10 हज़ार रुपए और बढ़ाने को मंजूरी दे दी है.

सोमवार की सुबह प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में ये फैसला लिया गया.

अब सांसदो को चुनाव क्षेत्र भत्ता और दफ़्तर ख़र्च के लिए प्रति महीने पांच-पांच हज़ार रुपए अतिरिक्त दिए जाएगे.

इन रुपयों पर कर में भी छुट दी गई हैं.

वामदलों की नाराज़गी

वामदलों का कहना है कि जिस तरीक़े से वेतन वृद्धि की गई है हम उसके ख़िलाफ़ है.

सीपीएम पोलित ब्युरो के सदस्य और राज्यसभा सांसद सीताराम यचुरी का कहना है कि ''एक ऐसी प्रणाली होनी चाहिए जिसमें सांसद शामिल न हों बल्कि वेतन आयोग में एक नियम जोड़ा जाना चाहिए जो सांसदों का वेतन तय करे.''

यचुरी ने कहा कि जब संसद में ये प्रस्ताव लाया जाएगा तो सीपीएम इसका समर्थन नहीं करेगा और न ही वे बहस में शामिल होंगें.''

दरअसल शुक्रवार को ही कैंद्रीय मंत्रिमंडल ने सांसदों का वेतन तीन गुना बढ़ाया था जिसके मुताबिक़ अब हर सांसद का वेतन 16 हज़ार से बढ़कर 50 हज़ार रुपए प्रति माह हो जाएगा.

लेकिन इस बढ़ोत्तरी पर भारतीय जनता पार्टी के साथ साथ राष्ट्रीय जनता दल,बहुजन समाज पार्टी,समाजवादी पार्टी जनता दल (युनाइटेड),शिवसेना और अकाली दल के सांसदो ने नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

नया तरीक़ा अपनाने की वकालत

भागलपुर से सांसद और बीजेपी के प्रवक्ता शहनवाज़ हुसैन का कहना है कि सांसदों का वेतन सम्मानजनक होना चाहिए लेकिन हम ये हमेशा से कहते आए है कि एक ऐसा तरीक़ा बनाया जाना चाहिए ताकि सांसद अपना वेतन ख़ुद न निर्धारित करें.

शाहनवाज़ ने कहा कि कैबिनेट ने भत्ता तो बढ़ाया है लेकिन अगर हम घर से मदद न ले तो संसदीय क्षेत्र के लिए ख़र्च पूरा नहीं पड़ता, जैसे दूसरे मूलकों में एक संस्था सांसदों का वेतन तय करती है वैसे ही भारत के सांसदों के लिए भी किया जाना चाहिए.

संयुक्त संसदीय समिति ने ये प्रस्ताव दिया था कि की सांसदों का वेतन 16 हज़ार रुपए से बढा़कर 80 हज़ार कर दिया जाए लेकिन कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को नामंजूर कर 50 हज़ार रुपए प्रति माह करने का फ़ैसला किया था.

सांसदों को दफ़्तर के लिए और चुनाव क्षेत्र के लिए प्रति माह 20-20 हज़ार रुपए भत्ता मिलता था जिसे बढ़ाकर 40-40 हज़ार कर दिया गया था लेकिन अब कैबिनेट के ताज़ा फ़ैसले के बाद अब ये 45-45 हज़ार हो गया हैं.

शुक्रवार को इस मुद्दे पर संसद में बीजेपी,सपा,आरजेडी,बसपा और जेडी(यु) के सांसदों ने काफ़ी हंगामा किया था और सांसदों का अपमान बंद करो के नारे भी लगाए थे.

भारत के सांसदों के नए वेतन की तुलना में अमरीका में सांसदों का वेतन 13 गुना , कनाडा में 11 गुना और ब्रिटेन में आठ गुना ज़्यादा है.

जानकारों के मुताबिक़ ये विवाद अंतहीन बहस का विषय है.

जंहा एक तबक़ा ये कह रहा है कि वेतन के साथ साथ सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं को भी देखा जाना चाहिए तो दूसरा पक्ष वेतन पर ज़ोर देता है.

बहरहाल एक सवाल ये भी है कि वेतन राजनीति के लिए है या फिर जन सेवा के लिए.

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