'मुंबई हवाईअड्डे के रनवे पर टूट-फूट'

फाइल फोटो
Image caption मुंबई हवाईअड्डे के रनवे पर जल्द हो रहे टूट- फूट से बढ़ती परेशानियां

एक तरफ़ मुंबई में दूसरे हवाईअड्डे को नवी मुंबई में बनाने को लेकर बहस ज़ोर पकड़ हो रही है तो दूसरी ओर मुंबई हवाईअड्डे के अधिकारियों का कहना है कि हवाईअड्डे पर ट्रैफ़िक का दबाव इतना ज़्यादा है कि उसका असर हवाईअड्डे के रनवे पर भी दिखा है और वहाँ टूट-फूट ज़्यादा जल्दी हो रही है.

कई बार टूट-फूट इतनी बढ़ गई है कि रनवे को अचानक बंद करना पड़ा है. पिछले हफ़्ते ऐसी ही एक घटना में मुख्य रनवे को अचानक बंद करना पड़ा था ताकि टूट फूट की मरम्मत की जा सके.

आवाजाही पर असर

ऐसा करने में 20 मिनट से आधा घंटे तक का वक्त लगता है. इसका असर उड़ानों की आवाजाही पर पड़ता है.

मुंबई हवाईअड्डे पर दो रनवे हैं.

टूट-फूट की मरम्मत का काम हफ़्ते के निर्धारित दिनों पर किया जाता है, लेकिन कई बार ट्रैफ़िक के भारी दबाव या फिर कुछ और कारणों से ऐसा नहीं हो पाता और रनवे को, किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के, अचानक मरम्मत के लिए बंद करना पड़ता है.

मुंबई हवाईअड्ड़े की देखरेख करने वाली कंपनी मुंबई इंटरनेशनल एअरपोर्ट प्राईवेट लिमिटेड (मायल) के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया, ‘अगर हम दूसरे देशों के हवाईअड्ड़ों की ओर देखें तो कई जगह पर्यावरण की वजह से या फिर किसी और कारण से हवाईअड्डों पर उड़ानें रात में बंद रहती हैं, लेकिन मुंबई और दिल्ली हवाईअडडों पर दबाव इतना ज़्यादा है कि उन्हें 24 घंटे काम करना पड़ता है. बड़े हवाईजहाज़ों के उड़ान भरने और रनवे पर दबाव पड़ने की वजह से कई जगह रनवे पर टूट फूट हो जाती है. इस वजह से रनवे की लगातार रखरखाव की ज़रूरत पड़ती है. आपको याद रखना होगा कि एअर ट्रैफ़िक कंट्रोल रनवे चलाता है, हम इसकी देखभाल करते हैं.’

रोशनी कम होने की वजह से दूसरे रनवे पर से उड़ाने भरने में परेशानी होती है.

कुछ हलक़ों में रनवे में हुई टूट-फूट को गड्ढे कहकर भी पुकारा कहा गया है, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक़ ये स्थिति को बढ़ाचढ़ा कर पेश करने वाली बात है.

मॉनसून का भी प्रभाव

जारी मॉनसून की वजह से मुंबई हवाईअड्डे पर अधिकारियों की परेशानियाँ बढ़ गई हैं क्योंकि भारी बारिश की वजह से उन्हें रखरखाव का काम करने में अड़चन पेश आती है.

पिछले साल हवाईअड्डे के दूसरे रनवे को दोबारा बनाया गया था.

मुख्य रनवे को दोबारा बनाने के लिए ड़ॉयरेक्टर जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन के पास प्रस्ताव भेजा गया है, और अधिकारियों को उम्मीद है कि नवंबर में काम शुरू हो जाएगा. उस वक़्त मुख्य रनवे को लंबे समय के लिए बंद करना पड़ेगा और ट्रैफ़िक का सारा दबाव दूसरे रनवे पर आ जाएगा.

इसको लेकर कुछ पायलटों में चिंता है. एक पायलट ने बीबीसी को बताया कि दूसरे देशों में बारिश के बावजूद रनवे पर पानी इकट्ठा नहीं होता, लेकिन भारत में रनवे पर पानी इकट्ठा हो जाता है जिससे उतरने में असुविधा होती है.

ऐसी शिकायतें भी आई हैं कि बिजली चले जाने की वजह से टैक्सीवे (जिस पट्टी पर विमान उतरता है) की लाइटें भी बुझ गई हैं, जिससे सुरक्षा का ख़तरा उत्पन्न हो सकता है क्योंकि पायलट को विमान ज़मीन पर उतारने में मुश्किल पेश आ सकती है.

अधिकारी बिजली चली जाने पर टैक्सीवे पर बल्बों के बुझ जाने की बात मानते हैं लेकिन कहते हैं कि उन्होंने चार साल पहले मुंबई हवाईअड्डे का कार्यभार संभाला है और वो हवाईअड्डे में मौजूद मूलभूत सुविधाओं में सुधार की कोशिश कर रहे हैं.

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