भ्रष्टाचार के आरोपों में अपांग गिरफ़्तार

अपांग
Image caption अरुणाचल प्रदेश में गेगांग अपांग 22 साल तक मुख्यमंत्री रहे हैं.

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गेगांग अपांग को राज्य की जन वितरण प्रणाली में करोड़ो रुपए के घोटाले में कथित रुप से शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया है.

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि अपांग को मंगलवार को राज्य की राजधानी इटानगर में उनके घर से गिरफ़्तार किया गया. उन्हें अरुणाचल पुलिस की विशेष जांच इकाई के अधिकारियों ने गिरफ़्तार किया.

राज्य में जन वितरण प्रणाली में एक हज़ार करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया था जिसके बाद मामले की जांच के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच इकाई का गठन किया गया.

गुवाहाटी हाई कोर्ट भारत का एकमात्र हाई कोर्ट है जो पूर्वोत्तर के सात राज्यों के मामलों की सुनवाई करता है.

जब जन वितरण प्रणाली में जो घोटाला सामने आया है वो अपांग के शासनकाल के समय का है. इस घोटाले के तहत ट्रांसपोर्ट में रियायत के करोड़ों के फ़र्ज़ी बिल को पास किया गया है.

इतना ही नहीं आवश्यक वस्तुओं की ख़रीद के लिए भी जो बिल पास किए गए हैं उनकी राशि बहुत ज़्यादा है.

गेगांग अपांग अरुणाचल की राजनीति में पिछले 25 सालों से हैं और वो 22 साल राज्य के मुख्यमंत्री रहे. इस दौरान वो कांग्रेस, बीजेपी, जनता पार्टी और अरुणाचल कांग्रेस में रहे.

वो जिस किसी राष्ट्रीय पार्टी में गए, वो विधायकों को अपने साथ ले गए और सरकार बना ली.

पिछले साल जांच इकाई ने अपांग के विश्वासपात्र माने जाने वाले एसपी भूटिया को गिरफ़्तार किया था.

जांच इकाई के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि अपांग के ख़िलाफ़ जांचकर्ताओं को ‘‘बहुत पुख़्ता सबूत’’ मिले और उसी के बाद उन्हें गिरफ़्तार करने का फ़ैसला किया गया.

जांच इकाई के पास ज़्यादातर सबूत भूटिया से पूछताछ से ही मिले हैं. भूटिया ढाई साल तक गिरफ़्तारी से बचते रहे जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार किया गया.

यह घोटाला तब सामने आया जब दिसंबर 2005 में भारतीय कृषि मंत्री शरद पवार ने अरुणाचल प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर बताया था कि परिवहन के बिल ज़रुरत से 412 करोड़ रुपए अधिक है.

इसके बाद बमांग एंथनी और डोमिन लोया ने जनहित याचिका भी दायर की जिसमें यह बात सामने आई है.

भारत के कुछ राज्यों में पहले भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत गिरफ़्तार किया गया है जिसमें बिहार के लालू प्रसाद और झारखंड के मधु कोडा का नाम सभी जानते हैं.

संबंधित समाचार