भिखारियों की मौत की जाँच

शिविर का दौरा

अधिकारी बंगलौर में भिखारियों के शिविर में हुई मौतों की जाँच कर रहे हैं.

शहर के बाहर स्थित इस सरकारी शिविर में इस वर्ष सौ लोगों की मौत हो चुकी है और पिछले एक हफ़्ते में ही यहाँ 27 लोगों ने दम तोड़ दिया है.

सामाजिक कार्यकर्ता इन मौतों के लिए सरकारी उपेक्षा को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. उनका आरोप है कि इन शिविरों की हालत दयनीय है.

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि मौतें सामान्य हैं. अधिकारी इसके पीछे किसी साजिश से भी इनकार करते हैं.

इस मामले के तूल पकड़ने के बाद कर्नाटक के राज्यपाल ने जाँच के निर्देश दिए थे और इसके कारण राज्य के सामाजिक कल्याण मंत्री को जाना पड़ा था.

सुधार का आश्वासन

आलोचनाओं के बाद राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने शिविर का दौरा किया और बुनियादी सुविधाओं में सुधार का आश्वासन दिया.

इस शिविर में ढाई हज़ार लोग रहते हैं और वे बीमारियों का शिकार बन रहे हैं.

शिविर में पाँच सौ लोगों के लिए मात्र दो शौचालय हैं.

ये शिविर भिखारियों को सड़कों से दूर रखने और उन्हें बढ़ईगिरी जैसे अन्य काम सिखाने के लिए स्थापित किया गया था.

लेकिन आलोचकों का कहना है कि शिविर में साफ़ सफ़ाई का स्तर बेहद ख़राब है.

विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया का कहना है,'' भिखारियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है. वहाँ 200 लोगों पर केवल एक डॉक्टर है.''

शिविर में रहने वाली एक बूढ़ी महिला गंगामा का कहना था,'' भिखारियों के पास कोई और रास्ता नहीं है. हम जाएं तो कहां जाएं.''

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