वेदांता, पॉस्को के पक्ष में उतरे पटनायक

Image caption लंदन में भी वेदांता के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए थे.

उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपने प्रदेश में लगाई जाने वाली वेदांता और पॉस्को की परियोजनाओं के बारे में सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से मुलाक़ात की.

पटनायक के मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पॉस्को के लिए ज़रूरी सरकारी मंज़ूरी की कार्रवाई में वो तेज़ी लाने की कोशिश करेंगे.

हालांकि वेदांता की परियोजना के लिए वो ऐसा कोई आश्वासन नहीं ले पाए.

स्थानीय लोग इन दोनों परियोजनाओं के ख़िलाफ़ लंबे समय से विरोध की आवाज़ उठाते रहे हैं.

क़रीब दो हफ्ते पहले केंद्र सरकार ने पॉस्को की परियोजना में भूअधिग्रहण सहित सभी कार्यों को रोकने के आदेश दे दिए थे.

ऐसा केंद्र सरकार ने एनसी सक्सेना कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद किया.

भूअधिग्रहण में वन क्षेत्रों में रह रहे आदिवासी और अन्य लोगों के अधिकारों का उल्लंघन करने के आरोपों की जांच करने के लिए बनाई गई इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उड़ीसा सरकार ने संयंत्र के लिए भू अधिग्रहण से पहले ग्राम सभा की मंज़ूरी लेने की आवश्यक औपचारिकता पूरी नहीं की.

इस परियोजना के काम को दोबारा शुरू करने की दरख्वास्त के साथ उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से मिले.

मुलाक़ात के बाद नवीन पटनायक ने बताया,'' ये किसी एक कंपनी का सबसे ज़्यादा विदेशी निवेश होगा जिससे कई लोगों को रोज़गार मिलेगा और राज्य में विकास होगा. मुझे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भी आश्वासन दिया है कि वो पॉस्को परियोजना के काम को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए पूरी कोशिश करेंगे.''

दक्षिण कोरियाई कंपनी पॉस्को उड़ीसा में 54 हज़ार करोड़ रुपयों की लागत से एक विशालकाय स्टील संयंत्र स्थापित करना चाहती है.

इसके लिए उसने राज्य सरकार के साथ जून 2005 में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी किए थे.

विरोध

लेकिन देश में विदेशी पूंजी निवेश के इस सबसे बड़े प्रस्ताव पर पिछले पाँच साल में काम बहुत आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि स्थानीय लोग इस संयंत्र की स्थापना का विरोध कर रहे हैं.

विरोध के घेरे में उड़ीसा की नियामगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट की खुदाई के लिए लगाई जाने वाली परियाजना वेदांता भी है.

भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के आदेश पर की गई जांच की रिपोर्ट के अनुसार वेदांता की खदान के आने से लगभग 70 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले जंगल बर्बाद हो जाएंगे.

रिपोर्ट के अनुसार इस तबाही से स्थानीय डोंगरिया कोंध जनजाति का अस्तित्व ख़तरे में पड़ जाएगा.

डोंगरिया कोंध आदिवासियों का कहना है कि नियामगिरि पहाड़ियों को वो पवित्र मानते हैं और ये उनकी रोज़ी-रोटी का भी साधन है.

वहीं कंपनी का कहना है कि उसकी गतिविधियों से पर्यावरण को कोई ख़तरा नहीं है.

वेदांता की योजना इस इलाके में बॉक्साइट की खुदाई करके वहीं बने एक रिफ़ाइनरी में उससे ऐलूमीनियम बनाने की है और उनका कहना है कि उससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी.

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक वेदांता के बारे में भी बातचीत करने आए थे, लेकिन इसपर कोई ठोस आश्वासन उन्हें नहीं मिला.

उन्होंने ये ज़रूर बताया कि मंगलवार को उड़ीसा के वन सचिव इस बारे में बातचीत करने के लिए पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से मिलेंगे.

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