असम में देखते ही गोली मारने के आदेश

फाइल फोटो
Image caption असम में बहुत सारे चरमपंथी संगठन सक्रिय है.

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम और उससे सटे अरूणाचल प्रदेश की सीमा पर जारी उपद्रव को देखते हुए असम सरकार ने उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिए हैं.

असम के कुछ गावों और अरूणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित सरायपुंग की एक पुलिस चौकी पर सशस्त्र नागा छापामारों के ज़रिए किए गए हमलों के बाद सरकार ने ये आदेश जारी किए हैं.

असम सरकार के प्रवक्ता और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने बीबीसी को बताया कि गत सप्ताह से हथियार बंद नागाओं ने निरंतर अरुणाचल के तिराब ज़िले से असम के शिवसागर ज़िले के कई गांवों को अपने हमले का निशाना बनाया है.

उनके मुताबिक़ इन हमलों के पिछे नेशनल सोशलिष्ट काउंसिल ऑफ़ नागालैंड यानि एनएससीएन ने सक्रिय भूमिका निभाया है ताकि नागा हमलों से भयभीत होकर सरायपुंज जैसे इलाक़ों से असमिया लोग भाग जाएं और वहां नागा लोग आकर बसना शुरु करें.

'एनएससीएन का हाथ'

हेमंत विश्व शर्मा के मुताबिक़ इसी तरह एनएससीएन अपने वृहत नागा भूमि की मांग पर कामयाबी हासिल करने की कोशिश कर रहा है.

सरायपुंज में सशस्त्र नागाओं ने पिछले सप्ताह पहसे छह गावों में घुसकर आग लगा दिया, फिर एक पुलिस चौकी को जला दिया, बाद में शिवसागर पुलिस के एक कारवां पर गोलीबारी भी की.

हेमंत शर्मा ने बताया कि हालात पर क़ाबू पाने के लिए असम-अरुणाचल के पूरे सीमावर्ती इलाक़ों में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं ताकि हथियार बंद नागाओं का घुसपैठ रोका जा सके. अरुणाचल प्रदेश के तिराब ज़िलें में बहुत नागा रहतें हैं और एनएससीएन वहां काफ़ी सक्रिय है.

हालाकि एनएससीएन कह रही है कि इन हमलों के लिए वो ज़िम्मेदार नहीं है.

असम के साथ अरुणाचल प्रदेश , नागालैंड, मेघालय और मिज़ोराम जैसे राज्यों से सीमा विवाद बहुत सालों से जारी है. असम से अलग जैसे जैसे इन राज्यों का गठन हुआ है तभी से सीमा विवाद जारी है.

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