अयोध्या विवाद पर फ़ैसले की तैयारी

बाबरी मस्जिद, अयोध्या
Image caption बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि का मामला एक दफ़ा फिर सुर्ख़ियों में है

उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन अठारह साल बाद एक बार फिर अयोध्या विवाद की संभावित चुनौती का सामना करने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि हाईकोर्ट विवादित धार्मिक स्थल के स्वामित्व पर तीन हफ्ते बाद अपना फ़ैसला सुनाने वाला है.

उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने कई बैठकें करके पूरे प्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी हैं जो स्थानीय अधिकारियों की मदद करेंगे. ये अधिकारी अगले हफ़्ते तक अपने–अपने ठिकानों पर पहुँच जाएंगे.

ज़िलाधिकारियों से भी कहा गया है कि वे संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नज़र रखें.

मालूम हुआ है कि राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुश्री मायावती की ओर से एक पत्र केंद्र सरकार को भेजा है. इस पत्र में केंद्र सरकार को आगाह करते हुए बड़ी संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मांग की गई है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी अपने वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक करके कोर्ट के फ़ैसले से उत्पन्न होने वाली संभावित स्थिति पर विचार विमर्श किया. केंद्र ने सभी राज्यों को सतर्क कर दिया है.

सबसे अधिक सतर्कता अयोध्या में विवादित और अधिग्रहित परिसर के इर्द गिर्द है.

विवादित स्थल को जाने वाली सभी सड़कों पर बैरिकेडिंग और पहरा है. छह दिसंबर, 1992 को वहाँ बने अस्थायी मंदिर में दर्शन करने वालों को अपना सारा सामान जमा करके ही अंदर जाने दिया जाता है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि हाईकोर्ट का फ़ैसला आने तक अयोध्या में सम्पूर्ण अधिग्रहित लगभग 70 एकड़ परिसर में यथास्थिति बनाई रखी जाए, ताकि कोई पक्ष एकतरफा कार्रवाई न करने पाए.

फैज़ाबाद मंडल के कमिश्नर इस परिसर के रिसीवर हैं जो हर दूसरे रविवार को अदालत के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों के साथ मौक़े पर ही बैठक करते हैं.

अयोध्या शांत

ऊपर से देखने में अयोध्या शांत और सामान्य है. मगर अंदर से लोग डरे हुए हैं कि कहीं रामजन्म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद के चलते एक बार कर्फ्यू न झेलना पड़े.

लोगों को 1990 के कारसेवा के दौरान लगे असाधारण प्रतिबंध और छह दिसंबर, 1992 के बाद आगज़नी, दंगा, हत्या और कर्फ्यू की यादें ताज़ा हो रही हैं.

लोग एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि क्या फिर कर्फ्यू लगेगा?

लेकिन फैज़ाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरकेएस राठौर आश्वस्त हैं कि स्थानीय हिंदू- मुसलमान अमन चैन बनाए रखेंगे और अगर बाहर के लोगों ने कुछ गड़बड़ी का प्रयास किया तो उसके लिए पहले से ही यहाँ पर्याप्त फ़ोर्स है.

राठौर कहते हैं,'' हम लोग शांति स्थापित करेंगे और अगर हमें लगता है कि कोई बाहर का आदमी यहाँ आकर समस्या पैदा कर सकता है तो उसके लिए हमारी स्कीम तैयार हैं. हमारे यहाँ पर्याप्त फ़ोर्स हमेशा रहती है, हम लोग गड़बड़ी नही होने देंगे.''

विवादित परिसर की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन की हर तिमाही बैठक होती है.

मामले में मुसलमानों की ओर से मुख्य पैरोकार हाशिम अंसारी कहते हैं कि कोई बात होगी तो हम सीधे बड़े अफसरों को बताएँगे.

हाशिम अंसारी कहते हैं,'' हम मस्जिद हासिल करने के लिए क़ानून को हाथ में नहीं लेंगे और अमन क़ायम करने की हर कोशिश करेंगे. इसलिए कि हम जिस मुल्क में पैदा हुए हैं उसकी हिफाज़त भी करना है.''

अंसारी वादा करते हैं कि अगर वह हाईकोर्ट से मुक़दमा जीत जाते हैं तो हिंदू पक्ष को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पूरा मौक़ा देंगे.

मगर उन्हें डर है कि अगर हिंदू पक्ष जीत गया तो मुसलमानों को अपील का मौक़ा न देकर वह तुरंत निर्माण का काम शुरू करने की कोशिश कर सकता है.

हाशिम कहते हैं कि अयोध्या के हिंदुओं से उन्हें कभी कोई डर न पहले था न आज है. स्थानीय हिंदुओं के साथ उनके घरेलू रिश्ते हैं. सपरिवार एक दूसरे के यहां दावत में जाते हैं.

चिंता

लेकिन हाशिम आरएसएस के एक बड़े पदाधिकारी के उस बयान से चिंतित हैं, जिसमें ताक़त के ज़रिये राम मंदिर बनाने की बात कही गई है.

विश्व हिंदू परिषद फिलहाल पूरे देश में हनुमान शक्ति जागरण अभियान चला रही है. यह कार्यक्रम 16 अगस्त से शुरू हुआ और 15 नवंबर तक चलेगा.

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा कहते है कि हम लोग संकट मोचन हनुमान जी की स्तुति कर रहे हैं. फिलहाल अयोध्या कूच का हमारा कोई कार्यक्रम नहीं है.

विश्व हिंदू परिषद सीधे तौर पर मुक़दमे में पक्षकार नहीं है और वह संसद में क़ानून बनाकर राम मंदिर बनाने के लिए विवादित परिसर की मांग कर रही है.

हिंदुओं की ओर से रामानंदी सम्प्रदाय का निर्मोही अखाड़ा पिछले क़रीब सवा सौ वर्षों से विवादित स्थान पर मंदिर बनाने की क़ानूनी लड़ाई लड़ रहा है.

निर्मोही अखाड़े की ओर से मुख्य पैरोकार महंत भास्कर दास भी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अयोध्या के स्थानीय हिंदू मुसलमानों में आपसी भाईचारा क़ायम है और फिलहाल यहाँ कोई तनाव नहीं है.

महंत भास्कर दास भी मानते हैं कि जो भी पक्ष हारेगा वो तुरंत सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी करेगा.

मगर भास्कर दास इस प्रश्न का सीधा उत्तर नहीं देते कि क्या कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद बवाल हो सकता है?

दार्शनिक अंदाज़ में वह कहते हैं,'' भविष्य की बात तो भगवान ही जानें. क्षण में होय आन कर ताना, उमा मर्म कोऊ नहीं जाना.''

यानी भविष्य तो कोई नही जानता, मगर इतना तो साफ़ है कि छह दिसंबर, 1992 के बाद से आम आदमी इस विवाद में पहले की तरह तन मन धन न्यौछावर करने को तैयार नहीं है.

संबंधित समाचार