बड़े माओवादी नेता की मौत

टूटी हुई पटरी
Image caption जाँच एजेंसियों का कहना है कि उमाकांत महतो और बापी महतो ने पटरी का हिस्सा निकाल दिया था

पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस रेल दुर्घटना के मुख्य अभियुक्तों में से एक और बड़े माओवादी नेता उमाकांत महतो की एक मुठभेड़ में मौत हो गई है.

झाड़ग्राम के पुलिस अधीक्षक प्रवीण त्रिपाठी ने बीबीसी को बताया कि शुक्रवार को तड़के जंगल में हुई मुठभेड़ के बाद बरामद एक शव की शिनाख़्त उमाकांत महतो के रुप में हुई है.

उमाकांत महतो माओवादियों से जुड़े पीपुल्स कमेटी अगेंस्ट पुलिस एट्रोसिटीज़ (पीसीपीए) से जुड़े थे और इस हादसे के पीछे हुई तोड़फोड़ की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने उन्हें और बापी महतो को मुख्य अभियुक्त बताया था.

बापी महतो को पुलिस ने झारखंड से पहले ही गिरफ़्तार कर लिया था. पुलिस ने उनके अलावा कोई 12 लोगों की गिरफ़्तारी की है.

पश्चिम बंगाल में बीबीसी के संवाददाता सुबीर भौमिक का कहना है कि उमाकांत महतो का मारा जाना पुलिस के लिए सफलता भी है और नुक़सान की बात भी.

उनका कहना है कि पुलिस इस सफलता पर ख़ुश होगी लेकिन एक बड़ी रेल दुर्घटना के मुख्य अभियुक्त की मौत से जाँच का काम प्रभावित होगा.

उल्लेखनीय है कि गत 28 मई को पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में एक यात्री गाड़ी के पटरी से उतर जाने और फिर उससे मालगाड़ी की हुई टक्कर के बाद 150 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे.

प्रशासन ने इसके पीछे तोड़फोड़ की आशंका जताई थी और फिर माओवादियों को ज़िम्मेदार बताया गया था.

इस घटना की जाँच सीबीआई कर रही है.

मुठभेड़

पुलिस अधीक्षक प्रवीण त्रिपाठी के अनुसार मुठभेड़ शुक्रवार को तड़के झाड़ग्राम पुलिस ज़िले के लोधाशुली जंगलों में हुई.

Image caption ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के कई डिब्बों को नुक़सान पहुँचा था

उनका कहना है कि पुलिस बल और माओवादी दस्ते के बीच हुई गोलीबारी के बाद एक शव बरामद किया गया और उसकी पहचान उमाकांत महतो के रुप में की गई है.

उनका कहना है कि आमतौर पर माओवादी अपने मृत साथियों के शव साथ ले जाते हैं लेकिन मुठभेड़ की वजह से वे ऐसा नहीं कर सके.

अभी यह पता नहीं चला है कि इस मुठभेड़ में कोई और माओवादी नेता हताहत हुआ है या नहीं क्योंकि वे भागकर जंगलों के अंदर चले गए.

पुलिस अधीक्षक ने कहा, "एक महीने में तीसरी बार पुलिस ने मिली सूचना के आधार पर घेराबंदी की थी कि उमाकांत महतो वहाँ छिपा हुआ है. इससे पहले दो बार वह चकमा देकर निकल भागने में सफल हो गया था."

पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख भूपिंदर सिंह ने स्वीकार किया कि अगर उमाकांत महतो को जीवित पकड़ा गया होता तो जाँच में सहायता मिलती.

जाँच एजेंसियों का कहना है कि उमाकांत महतो और बापी महतो ने मिलकर ही ज्ञानेश्वरी रेल दुर्घटना से पहले पटरी का एक हिस्सा हटा दिया था.

सीबीआई ने इस दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार लोगों की सूचना देने के लिए एक लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था.

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