राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष नहीं

वसुंधरा राजे सिंधिया
Image caption वसुंधरा राजे सिंधिया के त्यागपत्र के बाद से पद रिक्त है

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के त्यागपत्र के बाद से राजस्थान में विपक्षी भाजपा में 'नेता प्रतिपक्ष' का पद खाली पड़ा है.

ये पद तब से खाली पड़ा है जब भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को विधान सभा चुनावों में हार के बाद इस्तीफ़ा देने को कहा.

इस पर पार्टी में काफी बवाल मचा और वसुंधरा राजे के समर्थक विधायकों ने पहले दिल्ली जाकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया और ख़ुद वसुंधरा राजे ने भी तीखे तेवर दिखाए.

मगर वसुंधरा राजे को इस साल फ़रवरी में अपना पद छोड़ना पड़ा.

तब से ही विधान सभा में पार्टी बिना किसी नेता के काम कर रही है.

समझा जाता है कि पार्टी के आंतरिक मतभेदों के चलते इस पद के लिए आम राय नहीं बन पाई है.

लेकिन पार्टी के राज्य अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने किसी गुटबाज़ी के आरोपों को ग़लत बताया और कहा कि जल्द ही नेता का चुनाव कर लिया जाएगा.

राजस्थान में सोमवार को जब विधान सभा का मॉनसून सत्र शुरू हुआ तो भाजपा के कार्यवाहक नेता प्रतिपक्ष घनश्याम तिवारी के सहारे काम चलाना पड़ा.

वसुंधरा राजे ने पिछले साल अगस्त में अपना इस्तीफ़ा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्त्व को सौंप दिया मगर इसे विधान सभा अध्यक्ष तक पहुँचने में महीनों लग गए.

अब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी कहते हैं कि पार्टी में ना तो कोई गुटबाज़ी है,ना ही नेता विपक्ष के चुनाव को लेकर कोई मतभेद है.

वसुंधरा राजे के समर्थक पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौर कहते हैं, "पार्टी पूरी तरह एकजुट है. गुटबाजी की बात निराधार है. हाँ वसुंधरा राजे राज्य की सर्वाधिक कद्दावर नेता हैं. उनकी राय महत्त्व रखेगी. पार्टी हाई कमान सबकी राय लेकर तय करेगा कि नेता कौन हो."

प्रेक्षक कहते हैं कि विधायक दल में वसुंधरा राजे का बहुमत है और पार्टी के लिए राजे की पसंद की उपेक्षा करना मुश्किल होगा इसीलिए नेता के चुनाव में देरी हो रही है.

संबंधित समाचार