पुष्कर में पुरोहिताई को लेकर खींचतान

फ़ाइल फ़ोटो
Image caption पुष्कर हिंदुओं का प्रमुख तीर्थस्थल है

हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ पुष्कर के पुरोहितों ने बाहर से आकर 'आन गाँव के सिद्ध' बने पुरोहितों को पवित्र झील के घाटों पर जजमानों के साथ पूजा पाठ से अलग कर दिया है.

पुष्कर के पुरोहित उन्हें 'आयलड़' कह कर पुकारते है.

पुरोहितों की जुबान में आयलड़ वो है जो पुष्कर के भांजे हैं या दामाद-जवाई.

श्री तीर्थ पुष्कर पुरोहित ट्रस्ट के अध्यक्ष लाडू राम पाराशर कहते हैं,'' हमने ऐसे लोगों को जो गत 50 वर्षों में पुष्कर आए और पुरोहिताई करने लगे, इस काम से बाहर कर दिया है क्योंकि ये हमारे वंशानुगत काम में हस्तक्षेप था.''

ट्रस्ट के सदस्य पुरोहितों ने पुष्कर में विरोध जुलूस निकला और हाल के वर्षो में पुरोहिताई करने वाले लोगों का विरोध किया.

पुष्कर में पुश्तैनी तौर पर सदियों से इस काम में लगे पुरोहित ख़ुद को जागीरदार कह कर संबोधित करते है. ट्रस्ट के मुताबिक पाराशर पुरोहित वेद व्यास की संतान हैं.

उनकी संख्या पुष्कर में कई हज़ार है और उनमें से कोई एक हज़ार से ज्यादा पुरोहिताई करते हैं.

ट्रस्ट के मुताबिक उनके यहाँ 850 पंजीकृत पुरोहित हैं. बहुमत पाराशर गोत्र के ब्राह्मणों का है, मगर कुछ अन्य गोत्र के पुरोहित भी हैं.

ट्रस्ट के अध्यक्ष लाडू राम आयलड़ का मतलब बताते है- जो पुष्कर की बहिन बेटियों के पुत्र और पति है और निकटवर्ती गाँव कस्बों में रहते हैं, लेकिन पुष्कर आकर पुरोहिताई करने लगे हैं.

उनके मुताबिक विरोध के बाद कोई 80 आयलड़ उनके पास आए और ट्रस्ट से माफ़ी मांग कर पुरोहित के काम से अलग रहने का वचन दिया है.

लाडू राम कहते हैं,'' हमें कोई दिक्कत नहीं वो कोई और काम करें, हम उनकी भरपूर मदद करेंगे. वो नौकरी व्यापार करें, मगर इस काम में उन्हें दाखिल नहीं होने दिया जा सकता.''

हर पुश्तैनी पुरोहित के पास वो पोथी है जिसके पन्ने पीढ़ी दर पीढ़ी पुष्कर आकर पूजा अर्चना करने वाले जजमानों के नाम पते दर्ज हैं.

खुद लाडू राम के पास ही 300 साल का रिकॉर्ड एक पोथी में दर्ज है. इन जागीरदार पुरोहितों को आयलड़ पुरोहितों से कई शिकायतें हैं.

बकौल लाडू राम,'' उन्हें पुरोहिताई की गंभीरता ही नहीं मालूम और फिर जजमान हमसे शिकायत करते हैं. इससे तीर्थराज की छवि ख़राब होती है.''

युवा पुरोहित संघ के अध्यक्ष गोविंद पाराशर कहते हैं,'' सवाल पुरोहिताई से होने वाली आय का नहीं है. दरअसल ये अधिकारों की बात है.''

वो कहते हैं, '' हम वंशानुगत तौर पर नियम परंपरा और विधि विधान का पालन करते रहे हैं, आयलड़ को इन सब बातों और अतीत का कोई ज्ञान नहीं होता.''

इस समय ब्रह्मा की नगरी तीर्थ यात्रियों से गुलजार रहती हैं. हर रोज़ कई हज़ार यात्री आते हैं और पवित्र झील में स्नान कर पूजा पाठ करते है.

झील के चारों और 52 घाट बने हैं. इस झील में मुद्दत बाद अच्छा पानी आया है. लिहाजा घाटों पर तीर्थ यात्रियों की भीड़ है.

अब ट्रस्ट का आदेश है कि पुरोहित अपने अपने जजमानों को पूजा पाठ में सहायता करेंगे, मगर इनमें कोई आयलड़ नहीं होगा.

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