बस्तर में नोटों की क़िल्लत

बस्तर
Image caption माओवादी असर वाले इलाक़ों में सड़क मार्ग से नोट पहुंचा पाना मुश्किल हो चुका है

बंद होते-होते चलने वाली एटीएम मशीनें, सुस्त पड़ा कारोबार और एक अनिश्चितता का माहौल.

यही है छत्तीसगढ़ बस्तर संभाग के अधिकांश सुदूरवर्ती इलाकों का हाल, जहाँ इन दिनों नोटों की काफ़ी क़िल्लत पैदा हो गई है.

कहा जा रहा है कि यह स्थिति उस समय से पैदा हुई है जब से रिज़र्व बैंक ने सड़क मार्ग से नोट नहीं भेजने का फ़ैसला किया.

बस्तर के व्यापारियों की संस्था 'बस्तर चैम्बर ऑफ़ कामर्स एंड इंडस्ट्री' का कहना है कि बस्तर के सुदूरवर्ती इलाक़ों में अभी भी नोटों की भारी कमी है.

नोटों की क़िल्लत

चैम्बर के अध्यक्ष किशोर परख ने बीबीसी को बताया कि पिछले तीन हफ़्तों से लोगों को ज़्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

परख कहते हैं, "सुदूर इलाक़ों के लोग और ख़ास तौर पर व्यापारी काफी परेशान हैं. न तो यहाँ एटीएम से पैसे निकल पा रहे हैं और न ही बैंकों से. बताते हैं कि नोटों की सप्लाई नहीं है. अब 'कोर बैंकिंग' होने की वजह से रक़म तो ट्रांसफर हो रही है मगर करेंसी नहीं आ पा रही है. बस्तर में तो मंडी से संबंधित व्यापार ही होता है. और मंडी का व्यापार पूरी तरह से नक़द पर ही होता है. ऐसे में यहाँ के लोग काफ़ी परेशान हैं, खास तौर पर सुदूरवर्ती इलाकों के लोग."

हालांकि जगदलपुर शहर में स्थिति काफ़ी अच्छी मानी जाती है मगर नोटों के अभाव का असर यहाँ के एटीएम पर देखा जा रहा है.

कई बैंकों के एटीएम काम तो करते हैं मगर उनमें एक सीमित संख्या में नोट होने की वजह से वह फ़ौरन बंद भी हो जाते हैं.

जगदलपुर के स्थानीय पत्रकार सत्यनारायण पाठक बताते हैं, "रिज़र्व बैंक ने बस्तर में बढ़ रही माओवादी हिंसा के मद्देनज़र सड़क से रोकड़ नहीं भेजने का फैसला लिया है तब से लोगों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. "

पिछले दिनों संभाग के सुदूर इलाकों की बैंक शाखाओं में नोटों की लूट की घटनाएं भी हुईं हैं. शायद रिज़र्व बैंक के फैसले के पीछे का एक यह भी कारण रहा हो.

भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी इस बाबत पूछे जाने पर कुछ भी कहने से इनकार करते हैं.

स्टेट बैंक के उप प्रबंधक स्वपन कुमार किर्तनिया कहते हैं, "करेंसी भेजने का काम रिज़र्व बैंक और सरकार का है. कैसे भेजना है, यह फैसला रिज़र्व बैंक को ही लेना है. हमारी इसमें कोई भूमिका नहीं. रिज़र्व बैंक को लगा कि सड़क से कैश भेजना सुरक्षित नहीं होगा."

इस इलाके में रिज़र्व बैंक की नागपुर इकाई के मार्फ़त कैश भेजा जाता है. यह इकाई रिज़र्व बैंक की मुंबई शाखा के अधीन है.

हेलिकॉप्टरों की मदद

प्रशासन और बैंक के अधिकारियों का कहना है कि अब हेलिकॉप्टर के माध्यम से नक़द सुदूरवर्ती इलाकों में पहुंचाया जा रहा है.

किर्तनिया के अनुसार अब हालत सामान्य होते जा रहे हैं.

मगर चैम्बर आफ कामर्स के परख का दावा है कि हालात को सामान्य होने में काफ़ी वक़्त लग सकता है.

परख कहते हैं, "हेलिकॉप्टर से नारायणपुर, बीजापुर और दूसरे सुदूर इलाकों में बड़े नोट भेजे गए हैं. छोटे नोटों की काफ़ी कमी है. बस्तर संभाग देश का सबसे संवेदनशील इलाका है. रिज़र्व बैंक को चाहिए कि यहाँ का विशेष ध्यान रखे."

वहीं बस्तर के ही कोंडागाँव स्थित भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक जैकब ने बीबीसी से बातचीत के दौरान कहा, "बीच में सुरक्षा कारणों से इस तरह की स्थिति पैदा हुई. मगर हम स्थानीय स्तर पर कैश की समस्या का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं. बीच बीच में सप्लाई की समस्या पैदा हो जाती है. मेरे बैंक में दो दिनों तक काफ़ी मुश्किलें हुईं. मगर हमने स्थानीय स्तर पर अपनी व्यवस्था कर ली है."

बैंक के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि अब स्थिति पहले से बेहतर तो है लेकिन स्थिति तब सामान्य होने लगेगी जब रिज़र्व बैंक हेलिकॉप्टर से नियमित कैश भेजना शुरू करेगा.

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