मोटापे से बचने के लिए कराया ऑपरेशन

नज़ीर अहमद और परिवार
Image caption डॉक्टरों को उम्मीद है कि नज़ीर अहमद का वज़न 190 किलो से घटकर 100 किलो तक हो जाएगा

करीब पाँच साल पहले 53 वर्षीय नज़ीर अहमद अब्दुर्रहमान ने अपने बढ़ते वज़न और जोड़ों के कस जाने से हो रहे दर्द की वजह से काम पर जाना बंद कर दिया था.

कुछ दिन पहले तक उनका वज़न 190 किलो तक पहुँच गया.

हिलना डुलना भी इतना कम हो गया कि उन्हें मुंबई के डोंगरी इलाक़े के अपने मकान की दूसरी मंज़िल से नीचे उतारने के लिए फ़ायर ब्रिगेड वालों को बुलाना पड़ा.

कर्मचारी उन्हें बिस्तर के साथ लेकर नीचे आए और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया.

उनके जोड़ों में दर्द का कारण यूरिक एसिड को बताया गया.

हाल ही में उनका ऑपरेशन किया गया. इस प्रक्रिया को बैरियट्रिक सर्जरी कहा जाता है.

बैरियट्रिक सर्जरी

डॉक्टरों ने बताया कि इस सर्जरी में पेट के आकार को छोटा कर दिया जाता है जिससे भूख कम हो जाती है.

कम खाने का असर वज़न पर पड़ता है.

उनके बेटे एजाज़ ने बताया," चाहे ऐलोपैथी हो या होम्योपैथी, हम कई डॉक्टरों के पास गए, लेकिन कोई मदद नहीं मिली. इस सर्जरी के बाद हमें कुछ उम्मीद दिखाई दी है."

डॉक्टरों को उम्मीद है कि अगले 12 महीने में नज़ीर का वज़न 100 किलो तक पहुँच जाएगा.

पिछले पाँच साल नज़ीर के लिए आसान नहीं रहे हैं. वो बिस्तर से उतर तक नहीं पाते थे और शरीर भी बहुत फूल गया था.

उन्हें अपने खाने पर नियंत्रण नहीं था. नौकरी भी की तो एक रेस्तरां में.

खाने में तंदूरी चिकन, चिकन चिली, चाइनीज़ और बिरयानी मिल जाए तो क्या कहने. मीठे में कैरामल कस्टर्ड उनकी मनपसंद थी.

बेपनाह खाने और ग़लत जीवन शैली को वो वज़न बढ़ने का कारण मानते हैं. लेकिन इसका एक और कारण था- सदमा.

सदमा

उनका आरोप है कि बंगलौर के बैंक अलअमीन इस्लामिक फॉउंडेशन ने उन्हें और कई और लोगों को कथित तौर पर धोखा दिया और उससे जो सदमा पहुँचा उससे उनकी हालत ख़राब हो गई.

वो कहते हैं,'' मैंने 2.69 लाख रुपए बैंक में जमा करवाए थे, लेकिन एक पैसा भी मुझे वापस नहीं मिला. मैने दूसरे लोगों को भी इस्लाम के नाम पर बैंक में पैसा जमा करने के लिए कहा था, उनका भी पैसा डूब गया. मेरे भाई का करीब 2.10 लाख रुपए डूब गए. बैंक के अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं हैं और मामला अदालत में है. कुछ लोगों को उन्होंने सिर्फ़ 40 प्रतिशत पैसा दिया."

नज़ीर अहमद कहते हैं कि बचपन से ही उन्हें खाने का शौक था, लेकिन पैसे डूबने की वजह से वो सारा दिन सोचते रहते थे कि घर कैसे चलेगा.

धीरे-धीरे उनके जोड़ कसने लगे और उनमें बहुत दर्द होने लगा.

उनका कहना है कि वर्षों तक रेस्तराँ पर बैठने के बाद जोड़ कड़े हो गए थे और पेशाब करने में समस्या होने लगी.

घंटों काउंटर पर बैठे रहने और देर रात सोने से उनकी हालत पर असर पड़ा.

वो कहते हैं, " पहले मुझे लगा कि मुझे अपना खाना पीना कम करना पड़ेगा. मैने डॉयटिंग की, लेकिन महीने दो महीने में डायटिंग ख़त्म हो जाती थी. मैं सभी रोज़े रखता हूँ, लेकिन इफ़्तारी और सेहरी में इतना स्वादिष्ट खाना खा लेता था कि मेरे स्वास्थ्य पर उसका असर पड़ता. मेरी पत्नी अच्छे-अच्छे स्वादिष्ट खाने बनाकर देती थी. डॉक्टरों ने बताया कि मुझे सर्जरी से बहुत फ़ायदा होगा. अब देखिए कितना फ़ायदा होता है."

नज़ीर अहमद के लिए दिन भर घर में समय काटने के लिए टीवी पर समाचार या फिर क्रिकेट का सहारा होता था. धीरे-धीरे उनका हिलना डुलना तक मुश्किल हो गया और उनका वज़न बढ़ने लगा.

लेकिन वो कहते हैं कि सर्जरी के बाद खाने पर नियंत्रण करेंगे नहीं तो इतने सारे लोगों की मेहनत बेकार हो जाएगी.

संबंधित समाचार