नक्सली चुप नहीं बैठेंगे: नीतीश

Image caption मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का कहना है कि राज्य में भयमुक्त चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती अहम है.

बंधकों की रिहाई के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मांग की है कि बिहार के चुनावों में हर बूथ पर केंद्रीय बल तैनात हों क्योंकि नक्सली चुप नहीं बैठेंगे. साथ ही उन्होंने नक्सलियों से भी चुनाव में भाग लेने का आह्वान किया.

उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस के सामने कई अन्य चुनौतियां होंगी और बेहतर होगा यदि चुनाव में सुरक्षा का भार केंद्रीय बलों को पूरी तरह से दे दिया जाए.

उनका कहना था, “मेरा ये विनम्र निवेदन है बल्कि ये मेरी मांग है केंद्र से कि शत-प्रतिशत बूथ पर केंद्रीय बल तैनात हों. देश में उस समय कोई और चुनाव भी नहीं है और इस तैनाती का खर्च राज्य सरकार उठाए.”

नीतीश कुमार ने कहा कि लोगों को भूलना नहीं चाहिए कि ये नक्सली कार्रवाई चुनाव से ठीक पहले हुई है और फिर से हो सकती है.

उनका कहना था कि इसलिए ये ज़रूरी है कि चुनाव भयमुक्त माहौल में हों.

मुख्यमंत्री ने माओवादियों से भी अपील की है कि वो हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं.

उनका कहना था, “इसमें देर क्यों? अभी बिहार के चुनाव में शामिल हो जाएं और जिनके प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं खुलकर उनका नेतृत्व करें.”

रिहा हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने देश के बुद्धिजीवियों, सभी राजनीतिक दलों, मीडिया और बिहार की जनता को भी धन्यवाद दिया.

उनका कहना था, “सभी लोगों की अपील का प्रभाव पड़ा है.”

हिंसा छोड़ें

साथ ही मुख्यमंत्री ने अफ़सोर ज़ाहिर किया कि माओवादियों ने बिना शर्त बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया.

उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दल इस बात पर एकजुट थे कि यदि माओवादी बातचीत के लिए आते हैं तो उस दौरान उनपर कोई पुलिस कार्रवाई नहीं होगी.

उनका कहना था, “माओवादियों से मैं कहना चाहूंगा कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं होगा. भारत में लोकतंत्र के अलावा कुछ कामयाब नहीं होगा.”

वहीं पटना से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर का कहना है कि रिहा हुए पुलिसकर्मियों को अब लखीसराय से सीधा उनके घर भेजा जा रहा है.

पहले तय हुआ था कि उन्हें पटना लाया जाएगा और मीडिया से भी रूबरू करवाया जाएगा.

आभार

उधर सोमवार की सुबह रिहा हुए पुलिसकर्मी सब-इंस्पेक्टर रूपेश कुमार के चाचा अरुण कुमार सिन्हा ने रूपेश की रिहाई पर ख़ुशी ज़ाहिर की है.

बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह से बात करते हुए उन्होंने कहा, "मीडिया और सरकार के सहयोग के कारण ही ये हो पाया. मैं दोनो का आभारी हूँ."

अरुण कुमार सिन्हा ने बताया कि रूपेश के माता - पिता उनके घर आने का इंतजार कर रहे हैं और भगवान को प्रसाद चढ़ाने के बाद ही वे मीडिया से बातचीत करेंगे. साथ ही उन्होंने माओवादियों से हिंसा छोड़ने की अपील की.

छोड़े गए पुलिसकर्मी में सब-इंस्पेक्टर अभय यादव और बिहार मिलिट्री पुलिस के हवलदार एहसान ख़ान भी शामिल हैं जबकि बंधक बनाए गए चौथे पुलिसकर्मी लुकास टेटे की पहले हत्या कर दी गई थी.

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