अयोध्या पर फ़ैसला 24 सितंबर को

Image caption छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या में राम जन्म भूमि बनाम बाबरी मस्जिद विवाद पर अपना फैसला सुनाने के लिए 24 सितम्बर की तारीख़ तय कर दी है.

कोर्ट की लखनऊ बेंच में तीन जजों की एक विशेष पीठ ने 26 जुलाई को मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था.

ये तीन जज हैं जस्टिस एस यू खान, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस धर्मवीर शर्मा.

जस्टिस शर्मा पहली अक्तूबर को रिटायर होने वाले हैं इसलिए उससे पहले अदालत का निर्णय आना ज़रूरी है.

ऐसा नहीं होने पर एक नई पीठ को पूरे मामले की फिर से सुनवाई करनी पड़ेगी.

सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ज़फरयाब जीलानी के अनुसार अदालत ने बुधवार को मुक़दमे के फ़ैसले की तारीख के बारे में सूचना दी.

अदालत को मुख्य रूप से यह तय करना है कि जिस स्थान पर विवादित बाबरी मस्जिद स्थित थी वह किसकी संपत्ति है. यह ज़मीन लगभग 1250 वर्ग मीटर है.

चुनौती

अयोध्या विवाद भारत के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव का एक प्रमुख मुद्दा रहा है और देश की राजनीति को एक लंबे अरसे से प्रभावित करता रहा है.

मुस्लिम पक्ष ने बराबर कहा है कि वह अदालत का फैसला मानेगा. लेकिन हिंदुओं में विश्व हिंदू परिषद के समर्थकों का एक तबका यह कहता आया है कि यह उनकी धार्मिक आस्था का मामला है, जिसका फैसला अदालत नहीं कर सकती.

विश्व हिंदू परिषद की मांग है कि सरकार संसद में कानून बनाकर विवादित ज़मीन उसे एक विशाल राम मंदिर बनाने के लिए दे दे. लेकिन बहुत से लोग इससे सहमत नहीं हैं.

विवाद को बातचीत से हल करने की कोशिश भी अब तक सफल नही हुई हैं.

इस फैसले को लेकर पूरे देश में सरगर्मी है और केंद्र तथा राज्य सरकार कोर्ट के फैसले के बाद संभावित चुनौतियों से निबटने की तैयारी कर रही हैं. मुख्य चुनौती शांति व्यवस्था बनाए रखने की है, क्योंकि हिंदू ओर मुस्लिम दोनों समुदाय भावनात्मक रूप से इससे जुड़े हैं.

माना जाता है कि अंतिम फैसला अपील के जरिये सुप्रीम कोर्ट में तय होगा.

भारतीय जनता पार्टी और विश्वहिंदू परिषद सहित कई हिंदू संगठनों का दावा है कि हिंदुओं के आराध्यदेव राम का जन्म ठीक वहीं हुआ जहाँ बाबरी मस्जिद थी.

उनका दावा है कि बाबरी मस्जिद दरअसल एक मंदिर को तोड़कर बनवाई गई थी और इसी दावे के चलते छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरा दी गई.

दूसरी ओर मुसलमानों का दावा है कि बाबर ने खाली जमीन पर मस्जिद बनवायी थी.

इसके अलावा वहाँ ज़मीन के मालिकाना कब्ज़े का विवाद भी है.

संबंधित समाचार