फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हत्या का मामला

संजीत (फ़ाइल)
Image caption संजीत की माँ ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी

मणिपुर में इस साल अगस्त में एक युवक की कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हुई मौत के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो ने इम्फ़ाल शहर के थाना प्रभारी और मणिपुर पुलिस के आठ कमांडो के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल की है. उनके ख़िलाफ़ हत्या और संबंधित धाराओं के तहत मामला चलेगा.

इम्फ़ाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए अभियुक्तों की गिरफ़्तारी का वॉरंट जारी किया है.

ग़ौरतलब है कि मारे गए युवक चुंगखाम संजीत को एक पूर्व चरमपंथी बताया गया था जिसने आत्मसमर्पण कर दिया था.

लेकिन एक मीडिया रिपोर्ट और तस्वीरों के ज़रिए ये दावा किया गया था कि इम्फाल में राज्य विधानसभा के पास बिना किसी उकसावे के संजीत को मार दिया गया.

इसके बाद राज्य में कई दिन हड़ताल और इस घटना के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन चलते रहे थे.

राज्य में पहले ही सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून के ख़िलाफ़ भी आंदोलन चला रहा है. इस क़ानून के तहत सुरक्षाबलों को चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान में विशेष अधिकार मिले हुए हैं.

हाई कोर्ट का जाँच का आदेश

महत्वपूर्ण है कि मामला तब उठा जब मृतक युवक की माँ ने गुवहाटी हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था. हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि मृतक की माँ की शिकायत को एफ़आईआर यानी प्राथमिकी के तौर पर लिया जाए.

हाई कोर्ट ने पूरे मामले की जाँच के लिए केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) को आदेश भी दिया था.

सीबीआई ने अपनी जाँच में पाया है कि मणिपुर पुलिस के कमांडो बीटी रोड पर जाँच पड़ताल कर रहे थे जब उनके सामने के युवक आया जिसने फ़ायरिंग की.

फिर युवक भीड़ में शामिल हो गया. पुलिस ने जवाबी फ़ायरिंग की जिसमें पाँच लोग घायल हुए और एक महिला की मौत हो गई. पुलिस ने इलाक़े की घेराबंदी कर युवक की खोज शुरु की और बाद में जब वह मिला तो उसे उठाकर एक दुकान में ले गए.

सीबीआई की जाँच के मुताबिक युवक के पास उस समय कोई हथियार नहीं था और उसे बहुत क़रीब से गोली मारी गई और फिर उसके पास से एक पिस्तौल बरामद हुआ दिखाया गया.

ग़ौरतलब है कि ये सीबीआई की जाँच में सामने आया है लेकिन इस पूरे मामले पर अदालत में सुनावाई होनी बाक़ी है.

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