यमुना में बाढ़ की चेतावनी

उत्तर भारत में बाढ़
Image caption इससे पहले भी उत्तर भारत के कुछ राज्यों में बाढ़ आई थी जिसमें दिल्ली के भी कुछ निचले इलाक़े शामिल थे.

दिल्ली में यमुना का स्तर ख़तरे के निशान से काफ़ी ऊपर तक आ गया है. दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थिति गंभीर है लेकिन सरकार तैयार है.

पिछले दो दिनों में हरियाणा ने यमुना में लगभग आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया है. अधिकारियों को डर है कि शुक्रवार तक यमुना का स्तर कहीं 207 के निशान तक न पहुंच जाए.

ऐसा हुआ तो निचले इलाक़ों में बाढ़ आ सकती है. दिल्ली में यमुना का ख़तरे का निशान 204.83 मीटर है.

हालांकि दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा है कि इस 'गंभीर' स्थिति से निपटने के लिए सभी उपयुक्त क़दम पहले ही उठाए जा चुके हैं.

बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने कहा कि गुरुवार को हरियाणा के हथनीकुंड बराज से यमुना में पानी छोड़े जाने से शुक्रवार शाम तक पानी दिल्ली पहुंच जाएगा. आशंका जताई जा रही है कि इससे जल स्तर 207 तक भी पहुंच सकता है.

केंद्रीय जल आयोग से दिल्ली सरकार को जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक़ शुक्रवार शाम ,10 सितंबर को यमुना का स्तर 206.90 तक पहुंच जाएगा.

अधिकारियों ने बताया कि भारतीय समयानुसार गुरुवार रात साढ़े आठ बजे तक जल स्तर 205.09 मीटर तक पहुंच गया था.

एहतियाती क़दम

मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा," दिल्ली सरकार इस स्थित से निपटने के लिए एहतियाती क़दम उठा रही है. निचले इलाक़ों में 90 प्रतिशत से भी ज़्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों में विस्थापित कर दिया गया है. हम किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं."

हरियाणा ने हथनीकुंड बराज से बुधवार को 6.60 लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा था और गुरुवार को 2.13 लाख क्युसेक पानी फिर छोड़ दिया था.

शीला दीक्षित ने कहा कि हरियाणा ने भले ही क़रीब आठ लाख क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा है लेकिन उसमें से सिर्फ़ साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी ही दिल्ली तक आने की उम्मीद है.

Image caption पिछले महीने भी यमुना का जल स्तर बढ़ गया था

लेकिन इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इस स्थिति को गंभीर भी बताया है.

इस स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की गई जिसके बाद बाढ़ नियंत्रण मंत्री राजकुमार चौहान ने कहा कि यमुना नदी के किनारों पर 100 से भी ज़्यादा बूस्टर पंप लगाए गए हैं ताकि निचले इलाक़ों में आने वाले पानी को ख़ींच कर बाहर निकाला जा सके.

उन्होंने बताया कि लोगों को आश्रय देने के लिए कई कैंप भी लगाए जा चुके हैं.

खेलों के काम में रुकावट

बाढ़ के ख़तरे को देखते हुए राष्ट्रमंडल खेलों का काम भी रुक सकता है.

दिल्ली सरकार और राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति ने कहा, "बाढ़ से ख़तरे को देखते हुए अक्षरधाम इलाक़े में खेलों के कुछ स्थानों, यहां तक कि खेल गांव पर काम एक दिन के लिए रोका जाएगा."

पहले ही खेल गांव के स्थान को लेकर कई सवाल उठ चुके हैं जिसमें बाढ़ नियंत्रण विभाग एक चेतावनी भी दे चुका है कि खेल गांव खेलों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं है क्योंकि यमुना का ज़रूरत से ज़्यादा स्तर बढ़ने पर पानी खेल गांव में जा सकता है.

उसके बाद पानी को नियंत्रण में रखने के लिए एक बांध बनाया गया था.

संबंधित समाचार