हिंसा को देखते हुए कश्मीर पर सर्वदलीय बैठक

कश्मीर प्रदर्शन

भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा भड़कने के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (एएफएसपीए) जैसे विवादास्पद मुददे पर निर्णय टाल दिया और वहां की नाजुक स्थिति पर विचार करने के लिए 15 सितंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय किया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में जम्मू-कश्मीर के हालात की समीक्षा की और वहाँ के हिंसक घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई.

ग़ौरतलब है कि भारत प्रशासित कश्मीर में दो अलग-अलग कारणों से हो रहे प्रदर्शनों पर हुई सुरक्षा बलों की फ़ायरिंग में कम से कम 18 लोग मारे गए हैं और लगभग सौ लोग घायल हो गए हैं.

'आज़ादी' की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों का दौर जारी ही था लेकिन 11 सितंबर को अमरीका में क़ुरान के अपमान की घटना से नाराज़ लोग भी प्रदर्शन करने सड़कों पर उतर आए.

एक विदेशी चैनल ने अमरीका में कुरान के अपमान करने की कुछ तस्वीरें चलाई जिसके बाद प्रदर्शनकारी काफ़ी उग्र हो गए और एक स्कूल में भी आग लगा दी.

क़ुरान के अपमान का विरोध करने के लिए कश्मीर घाटी के विभिन्न इलाक़ों में रविवार की रात से ही हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए.

प्रदर्शनकारियों ने अमरीका और भारत विरोधी नारे लगाए और राष्ट्रपति ओबामा के पुतले भी जलाए. हिंसक प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों ने कई जगह गोली चलाई जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सोमवार रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की बैठक हुई राज्य के विभिन्न गुटों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने का इरादा जाहिर किया.

बैठक के बाद जारी बयान में जम्मू कश्मीर के लोगों से विशेषकर युवाओं से अपील की है कि वे हिंसक प्रदर्शनों से बचें और शांति व्यवस्था कायम रखें.

बयान में कहा गया कि यूपीए सरकार का हमेशा से मानना रहा है कि बातचीत के जरिए सम्मानजनक और स्थाई समाधान निकल सकता है.

आधिकारिक बयान में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम का कोई जिक्र नहीं है.

बैठक से पहले अटकलें लगाई जा रही थीं कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम को आंशिक रूप से हटाए जाने की मांग पर विचार किया जा सकता है.

हिंसा जारी

Image caption प्रदर्शनकारियों ने अमरीका और भारत विरोधी नारे लगाए और राष्ट्रपति ओबामा का पुतला भी जलाया

कश्मीर में शनिवार को ईद के बाद से ही हिंसा जारी है. सोमवार को दो अलग अलग प्रदर्शन हुए हैं.

मारे गए लोगों में एक सातवीं कक्षा का छात्र भी है. एक पुलिस के जवान की मौत प्रदर्शन के दौरान एक गाड़ी से कुचलने से हो गई.

नाराज़ भीड़ ने प्रोटेस्टेंट चर्च के टाइंडेल बिस्को स्कूल में आग लगाने के अलावा कई सरकारी इमारतों और एक सरकारी गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया.

प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन पर भी हमला किया.

हुमहामा, बदगाम, चरार-ए-शरीफ़, हरवान, पांपोर, अनंतनाग और अजस में हिंसक प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

सोमवार को श्रीनगर सहित अन्य शहरों और क़स्बों में कर्फ़्यू जारी रखने का एलान किया गया था. लेकिन लोग कर्फ़्यू का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे.

श्रीनगर के पास हुमहामा के प्रदर्शन को छोड़कर शेष प्रदर्शनों में क़ुरान के अपमान का विरोध करने वाले और भारत सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाले एक साथ ही सड़कों पर उतरे थे.

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