राजा और सीबीआई को कोर्ट का नोटिस

Image caption ए राजा पर टूजी स्पेक्ट्रम के आवंटन में घोटाले के आरोप लगते रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी किए हैं.

उल्लेखनीय है कि 2008 में टू जी स्पेक्ट्रम के आवंटन में कथित घोटालों की जांच सीबीआई कर रही है. इस मामले में दूरसंचार मंत्री ए राजा पर अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं.

इन आरोपों के बाद मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे.

सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से आग्रह किया था कि वो सीबीआई जांच पर नज़र रखे.

न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और एके गांगुली की खंडपीठ ने इस मामले में दूरसंचार मंत्रालय को नोटिस जारी कर दस दिन में जवाब मांगा है.

खंडपीठ ने सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को भी नोटिस जारी किए हैं.

इससे पहले सीपीआईएल ने दिल्ली हाई कोर्ट में ऐसी ही याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने 25 मई को ख़ारिज़ कर दिया था.

अब सीपीआईएल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर के हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती भी दी है.

सीपीआईएल का पक्ष रखते हुए एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि इस मामले में ऐसे दस्तावेज हैं जो राजा और अन्य लोगों के बीच सांठ गांठ दिखाते हैं लेकिन इसके बावजूद सीबीआई इस मामले में जांच आगे नहीं बढ़ा रही है.

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ए राजा के नेतृत्व में दूरसंचार मंत्रालय ने 2008 में 122 आपरेटरों को टू जी स्पेक्ट्रम के पूरे भारत में लाइसेंस अत्यंत कम कीमत पर दिए हैं.

ये स्पेक्ट्रम पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिए गए जबकि उम्मीद की जा रही थी इस तरह के आवंटन के लिए नीलामी का रास्ता अपनाया जाएगा.

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