मंदिर रामजन्मभूमि पर बने: आरएसएस

मोहन भागवत
Image caption मोहन भागवत ने महिला पत्रकारों से विशेष तौर पर बातचीत की है.

जन्मभूमि पर मंदिर बने ये हिंदू समाज की इच्छा है और यही हमारी इच्छा भी है, ये कहना है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत का.

दिल्ली में महिला पत्रकारों से एक मुलाक़ात मे भागवत ने कहा कि अदालत के अयोध्या मामले पर फैसले के बाद ही संघ आगे की रणनीति तय करेगा.

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी प्रतिक्रिया क़ानून के दायरे में होगी.

उन्होंने कहा, ''शांति को कोई ख़तरा नहीं होना चाहिए और हमारी तरफ से इसकी कोई आशंका नहीं होनी चाहिए.’’

उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश सरकार अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाह करते हुए अयोध्या में उच्च न्यायालय के 24 तारीख को आने वाले फैसले के लिए सुरक्षा व्यवस्था कर रही है पर उनका आश्वासन था कि संघ के कार्यकर्ताओं की ओर से काऩून व्यवस्था हाथ में नहीं ली जाएगी.

अदालत के फैसले के बाद तय किया जाएगा कि आगे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया जाए या नहीं.

भागवत ने कहा कि राम नाम आस्था से जुड़ा है भारत की पहचान है इसलिए रामजन्मभूमि पर ही राममंदिर की स्थापना होनी चाहिए. आगे के आंदोलन और भारतीय जनता पार्टी के इस पर रुख पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया.

उनका कहना था कि अगर मुस्लिम भी मंदिर निर्माण में सहयोग देते है तो देश में सामाजिक सौहार्द्र बढ़ सकता है.

भगवा आतंकवाद ग़लत

गृह मंत्री के भगवा आतंकवाद से देश को खतरे और संघ के कुछ कार्यकर्ताओं के बम विस्फोटो की जांच में नाम सामने आने पर आरएसएस प्रमुख ने कहा कि ‘भगवा आतंकवाद’ सही शब्द नहीं.

जहां तक संघ के कुछ लोगो के नाम है, आरएसएस इन्हें अपवाद के रुप में देखता है और अगर कोई पकड़ा जाता है तो कानून को अपना काम करना चाहिए.

लेकिन उन्होंने गृह मंत्री पी चिदंबरम को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ''ये कुछ ताक़तो के देश को बदनाम करने की कोशिश है. जब आप भगवा आतंकवाद कहते है तो कहते है कि ये देश के अंदर पैदा हुआ आतंकवाद है. दुनिया के सामने इसका क्या संदेश जाएगा. लोग हमें ‘अराजक देश’ कहेंगे.गृह मंत्री को ज़िम्मेदारी से शब्दों का चयन करना चाहिए. हिंदू और आतंकवाद कभी साथ नहीं हो सकते.’’

कश्मीर पर भागवत का कहना था कि जो कुछ कश्मीर में हो रहा है उससे कोई खुश नहीं.

उनका कहना था, ‘‘कश्मीर देशा का आधिकारिक अंग है पर उसे मानसिक रुप से भी अभिन्न अंग बनाने की ज़रुरत है. लोगो को विश्वास में लेने की ज़रुरत है और सभी पक्षो से बात करने की ज़रुरत है केवल पृथकावादियों से ही नहीं.हमें स्वायतता जैसी भाषा पसंद नहीं.’’

आम तौर से मीडिया की नज़रो से दूर रहने वाले संघ प्रमुख ने बेबाकी से अपनी बात रखी. शायद अपने संगठन की सोच को प्रचारित करने और मीडिया के रुख को अपने प्रति सकारात्मक करने की भी कोशिश थी खासतौर पर जब अयोध्या और कश्मीर जैसे मुद्दे गरमा रहे हो.

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