सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जाएगा कश्मीर

कश्मीर में विरोध प्रदर्शन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत प्रशासित कश्मीर में तनावपूर्ण स्थिति का समाधान खोजने के लिए बुलाई एक सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति स्थापित करने का एक मात्र रास्ता विचार-विमर्श (बातचीत) का है.

संसद में प्रतिनिधित्व रखने वाले सभी दलों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर का दौरा करेगा और अलग-अलग मत रखने वाले विभिन्न दलों और नेताओं से बातचीत करेगा.

बयान में कहा गया है - "...सभी सहमत थे कि भारतीय संविधान के तहत बातचीत, शांतिपूर्ण विचार-विमर्श के ज़रिए सभी वैध राजनीतिक माँगों पर चर्चा का पर्याप्त प्रावधान है. जम्मू-कश्मीर के लोगों तक पहुँचने और किसी भी तरह के फ़ैसल या पहल करने में सरकार आज की बैठक में हुई चर्चा को ध्यान में रखेगी..."

कश्मीर: पार्टियों की अलग-अलग राय

भारत प्रशासित कश्मीर में तीन महीने के हिंसक प्रदर्शनों और सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 89 लोग मारे गए हैं और भारत प्रशासित कश्मीर घाटी के सभी ज़िलों में कर्फ़्यू लागू है.

राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है और राजनीतिक दलों और अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर निशाना साधा है.

जम्मू में बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी के अनुसार बुधवार को मेंधार शहर में पुलिस की एक प्रदर्शन को तितर-बितर करने के प्रयास में चार लोग मारे गए हैं, दस से अधिक लोग घायल हुए हैं और पाँच की हालत गंभीर है.

'योजनाबद्ध तरीके से भी प्रदर्शन हुए'

सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को बुधवार को दिल्ली में संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि 'दुःख की बात है कि हाल में हमारे ही कुछ लोगों ने इस रास्ते को छोड़कर प्रदर्शनों का रास्ता अपनाया है.'

उन्होंने कहा कि कश्मीर में तनावपूर्ण स्थिति के समाधान के लिए वे 'सभी से बातचीत के लिए तैयार हैं, बशर्ते वे हिंसा त्याग कर वार्ता के लिए तैयार हों.'

मनमोहन सिंह ने कहा, "केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने पहले ही लोगों से अपील की है कि वे शांति कायम करें. मैं उस अपील को दोहराता हूँ. हम किसी के साथ भी बातचीत के लिए तैयार हैं बशर्ते वह हिंसा का त्याग कर दे."

उन्होंने कहा, "ये सही है कि कई प्रदर्शन अपने आप जनता की भावनाओं के कारण हुए हैं लेकिन इस बात का खंडन नहीं किया जा सकता कि कुछ प्रदर्शन सोच-समझकर योजनाबद्ध तरीके से हुए हैं. सार्थक चर्चा तभी हो सकती है जब शांति का माहौल कायम हो."

मनमोहन सिंह का कहना था कि जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं ने उन्हें लिखकर सुझाव दिए हैं और भरोसा जताया है.

केंद्र सरकार ने यह बैठक मुख्य रुप से यह तय करने के लिए बुलाई है कि मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए किस तरह के क़दम उठाए जाएँ. इस बैठक में उन सभी पार्टियों को आमंत्रित किया गया जिनके प्रतिनिधि संसद में मौजूद हैं.

'वे हमारे लोग हैं, हमारे नागरिक हैं'

बैठक में मौजूद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि संघर्ष और हिंसा के दौर में पले-बड़े हुए कश्मीरी युवाओं की वैध आकांक्षाओं का सम्मान होना चाहिए.

उनका कहना था, "हमें विचारधारा और राजनीति के मतभेदों से ऊपर उठना चाहिए. हमें इतनी गंभीर चुनौती का सामना कर रहे हैं कि ये मतभेद हमारी दृढ़ता, संवेदनशीलता और कारगर कार्रवाई के आड़े नहीं आने चाहिए. कांग्रेस चर्चा और मरहम लगाने की प्रक्रिया का पूरी तरह समर्थन करती है....हमें उचित फ़ैसले करने चाहिए ताकि हिंसा के चक्रव्यूह को तोड़ा जा सके."

उनका कहना था, "जम्मू-कश्मीर को लोग हमारे लोग हैं, वे हमारे नागरिक हैं. हमें लचीला रुख़ दर्शाना होगा. मेरा मानना है कि इसी से सौहार्द कायम होगा और संघर्ष और उथल-पुथल ख़त्म होगा."

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