'विशेष क़ानून सेना के लिए अहम'

Image caption सेना को विशेष अधिकार देनेवाले क़ानून पर इन दिनों काफ़ी चर्चा हो रही है.

भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह ने कहा है कि सेना के लिए बना विशेषाधिकार क़ानून निरंकुश नहीं बल्कि सेना को सशक्त बनाने वाला क़ानून है.

सेनाध्यक्ष का ये बयान कश्मीर में बढ़ती हिंसा, तनाव और उसके हल पर बैठक के लिए जा रहे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के ठीक पहले आया है.

सेनाध्यक्ष का कहना था, “सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि इस अधिनियम के प्रावधान न तो मनमाने हैं न ही संविधान के ख़िलाफ़.”

Image caption सेनाध्यक्ष का कहना है कि पिछले दो महीनों में सीमा पार घुसपैठ में तेज़ी आई है.

उन्होंने कहा कि सेना ने इस बारे में अपनी राय प्रतिरक्षा मंत्रालय को दे दी है और सरकार इस पर जो उचित समझेगी वो फ़ैसला करेगी.

सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम या एएफ़एसपीए इन दिनों काफ़ी चर्चा में है और इस हफ़्ते जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दिल्ली आए थे तो उन्होंने इस क़ानून को ख़त्म करने की मांग की थी.

घुसपैठ में तेज़ी

चेन्नई में ऑफ़िसर्स ट्रेनिंग एकेडमी के पासिंग आउट परेड के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह का कहना था कि ये इत्तफ़ाक हो सकता है कि कश्मीर में तनाव बढ़ने के बाद से घुसपैठ में भी तेज़ी आई है.

उनका कहना था, “इन दोनों में संबंध हो सकता है. संभव है कि पाकिस्तान घाटी की स्थिति का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहा हो.”

उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर हिंसा में कमी आई है लेकिन पिछले दो महीनों की बात करें तो घुसपैठ में तेज़ी दिखी है और मारे गए आतंकवादियों की संख्या भी बढ़ी है.

एक दिन पहले ही भारत सरकार ने पाकिस्तान से नियंत्रण रेखा से हो रही घुसपैठ पर लगाम कसने को कहा है. भारत सरकार ने अपने बयान में उनके शब्दों में पाकिस्तान में चल रहे प्रशिक्षण शिविरों को भी बंद करने की मांग की और कहा कि इन सबका परिणाम जम्मू-कश्मीर के लोगों को भुगतना पड़ता है.

पाकिस्तानी कश्मीर में चीन की बढ़ती भूमिका की ख़बरों पर सेनाध्यक्ष का कहना था, “हम स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं. यदि ये हमारे लिए चिंता का विषय बनता है तो हम सरकार को ख़बर करेंगे और उनके फ़ैसले का इंतज़ार करेंगे.”

संबंधित समाचार