24 घंटों में 60 की मौत, कई लापता

उत्तराखंड
Image caption उत्तराखंड में लगातार बारिश से पैदा हुई बाढ़ की स्थिति में कई मकान डूब गए हैं

उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से पिछले 24 घंटों में 60 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई है और कई लापता बताए जा रहे हैं..

राज्य में प्रलयंकारी बारिश और जगह- जगह बादल फटने और भूस्खलन के कारण अनगिनत मकान भी गिर गए हैं.

सरकार ने पूरे प्रदेश में हाई एलर्ट घोषित कर दिया है और केंद्र सरकार से माँग की है कि वह राज्य को आपदाग्रस्त घोषित करे.

हरिद्वार में गंगा सहित राज्य की अधिकांश नदियों में बाढ़ आ गई है और जगह-जगह से बादल फटने और भूस्खलन की खबरें आ रही हैं.

राहत और बचाव के लिए सेना और आईटीबीपी की मदद ली जा रही है.

सबसे ज़्यादा तबाही कुमाँऊ मंडल में हुई है.

अलमोड़ा, सोमेश्वर और नैनीताल में जगह- जगह बादल फटने और भूस्खलन के कारण मकान गिर गए हैं और मलबे में दबने से 38 लोगों की मौत हो गई है.

पाँच लोगों के लापता होने की बात भी कही जा रही है.

कोसी नदी में उफ़ान जारी है और बड़े पैमाने पर खेत-खलिहान, मकान औऱ सड़कें ध्वस्त हो गई हैं.

हलद्वानी में गोला नदी में आई बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हैं.

गढ़वाल में उत्तरकाशी में बड़कोट, बनचौरा और पौड़ी के तौल्यों डाडा रिखणीखाल में बादल फटने से भारी नुकसान की सूचना है.वहां भी कई मकान गिर गए हैं.

खेत और मवेशी बह गए हैं और लोग फँसे हुए हैं .

नदियों में बाढ़

अलकनंदा और मंदाकिनी ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और तटिय इलाक़ों का कटान जारी है.

हरिद्वार और हृशिकेश में गंगा ख़तरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है.

कई इलाक़ों में पानी घुस आया है और बाढ़ से अफरा-तफरी का माहौल है.

तटबंध टूट गए हैं, मकान खाली करा दिए गए हैं और लोगों को सुरक्षित इलाक़ों में भेज दिया गया है.

हर की पैड़ी जलमग्न हो गई है और मनसा देवी पहाड़ी से भी भूस्खलन हो रहा है. इससे नीचे बसे इलाक़ों को ख़तरा हो गया है.

सितारगंज और ऊधमसिंहनगर में भी बाढ़ की स्थिति है जिससे 50 हज़ार लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं.

सिंचाई मंत्री मातवर सिंह कंडारी का कहना है कि "ये दैवी आपदा है. अरबों का नुकसान हुआ है. बारिश और भूस्खलन की ऐसी तबाही पहाड़ में कभी नहीं हुई."

Image caption उत्तराखंड में बाढ़ से निपटने में आपदा प्रबंधन लाचार और बेबस नज़र आ रहा है.

मरनेवालों के परिजनों को 1 लाख रूपए देने की घोषणा की गई है और मवेशियों के लिए 10-15 हज़ार का मुआवज़ा दिया गया है.

उधर टिहरी झील का जलस्तर भी 826.4 मीटर पर पंहुच गया है जिससे पहले से ही बाढ़ग्रस्त इलाकों में संकट औऱ गहरा गया है.

तय मानकों के अनुसार विस्थापन औऱ पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए वहां फ़िलहाल सिर्फ़ 822 मीटर तक ही पानी भरने की अनुमति थी.

झील में बढ़े हुए पानी ने आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है.कई गांव,खेत-खलिहान और मकान इसमें डूब गए हैं.

आवागमन और संचार ठप

हाँलाकि सरकार के मुताबिक राहत और बचाव कार्य जारी हैं लेकिन आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह लाचार और बेबस नजर आ रहा है.

मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द करने के आदेश दिए हैं और विधायकों और मंत्रियों से कहा है कि वो अपने क्षेत्र में जाएँ.

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार सभी राजमार्ग बंद हैं.

कई मीटर तक सड़कें बह गई हैं औऱ जगह-जगह मलबा आने से आवागमन बंद हो गया है.

आपदा प्रबंधन मंत्री खजान दास का कहना है कि,“सारे संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं इसलिये राहत और बचाव कार्य में कठिनाई आ रही है. स्थानीय लोग ही एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं.पूरे नुकसान का अंदाज़ा भी तभी हो पाएगा जब पानी रूकेगा.”

मौसम विभाग के अनुसार इसके पहले 1978 में प्रदेश में इतनी विकराल बारिश और बाढ़ की स्थिति आई थी.

मौसम विभाग के निदेशक आनंद शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि “अगले 24 घंटों में भी और भारी बारिश और भूस्खलन का ख़तरा बना हुआ है और अब गढ़वाल क्षेत्र ज्यादा प्रभावित होगा.”

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