कश्मीर पहुँचा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल

भारत प्रशासित कश्मीर

दिल्ली से एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को दो दिनों के लिए भारत प्रशासित कश्मीर की दौरे पर है. केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम इस दल के साथ गए हैं.

यह प्रतिनिधिमंडल पिछले तीन महीनों से हिंसक प्रदर्शनों और कर्फ़्यू का सामना कर रहे कश्मीर में स्थिति का जायज़ा लेगा और वहाँ सभी राजनीतिक दलों और अलगाववादी नेताओं से चर्चा करने का प्रयास करेगा.

15 सितंबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कश्मीर की स्थिति पर विचार करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और इसी बैठक में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वहाँ भेजने का निर्णय लिया गया था.

हालांकि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वहाँ सभी राजनीतिक दलों और अलगाववादी नेताओं से बात करना चाहता है लेकिन मुख्य विपक्षी दल पीडीपी और अलगाववादी नेताओं के रुख़ से लगता नहीं कि वे इस बातचीत के लिए बहुत उत्सुक हैं.

उल्लेखनीय है कि गत जून से भारत प्रशासित कश्मीर में आज़ादी की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरु हुए थे. इन हिंसक प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों की गोलीबारी से अब तक सौ से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं और कई अन्य घायल हुए हैं.

इन तीन महीनों में घाटी अमूमन बंद ही रही है, कभी प्रदर्शनकारियों के बंद की वजह से तो कभी कर्फ़्यू की वजह से.

बातचीत

केंद्रीय गृहमंत्री पी चिंदबरम के साथ 38 सद्स्यों के इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य स्थिति का जायज़ा लेना और स्थानीय राजनीतिक दलों और अलगाववादी नेताओं से बातचीत करना है.

लेकिन प्रतिनिधिमंडल के वहाँ पहुँचने से पहले ही प्रमुख अलगाववादी नेता और हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के एक धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने इस प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया है.

उनका कहना है कि इस प्रतिनिधिमंडल के पास भारतीय संविधान से बाहर जाकर कश्मीर समस्या हल करने के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए वे प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेंगे.

जबकि हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के एक और धड़े के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ ने कहा है कि इस प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बारे में वे हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस से बाहर, समानविचारधारा वाले दलों से चर्चा करेंगे. इसमें यासीन मलिक के नेतृ्त्व वाला जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (जेकेएलएफ़) शामिल है.

उन्होंने कहा है कि अंतिम फ़ैसला सोमवार को ही लेंगे.

मीरवाइज़ ने कहा, "यह विडंबना है कि एक ओर से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से मिलने का निमंत्रण मिला है दूसरी ओर सरकार ने उन्हें घर पर नज़रबंद कर लिया है."

जबकि मुख्य विपक्षी दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि वे इसी सूरत में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से चर्चा करेंगी जब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कर्फ़्यू हटाने की घोषणा करें.

उनका कहना है कि सरकार कर्फ़्यू लगाकर इस प्रतिनिधिमंडल के उद्देश्यों को विफल करने में लगी हुई है.

महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि मानवाधिकार कार्यकर्ता और सिविल सोसायटी के लोग प्रतिनिधि मंडल से मिलें. हालांकि उनका कहना है कि कर्फ़्यू की वजह से इसमें बाधा आएगी.

प्रतिनिधिमंडल

Image caption महबूबा मुफ़्ती ने कर्फ़्यू हटाने की शर्त रखी है

इस प्रतिनिधि मंडल में भारतीय जनता पार्टी की ओर से सुषमा स्वराज और अरुण जेटली शामिल हो रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व मुलायम सिंह यादव, डीएमके का टीआर बालू, लोकजनशक्ति पार्टी का रामविलास पासवान, जनता दल युनाइटेड का शरद यादव और राष्ट्रीय जनता दल का प्रतिनिधित्व राजनीति प्रसाद करेंगे.

इसके अलावा इसमें तृणमूल कांग्रेस से दिनेश त्रिवेदी, एनसीपी से गोविंद राव आदिक, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से ई अहमद, सीपीएम से बासुदेव आचार्य, सीपीआई से गुरुदास दासगुप्ता, फ़ॉर्वर्ड ब्लॉक से नरहरि महतो और आरएसपी से प्रशांतो मजूमदार आदि होंगे.

जम्मू कश्मीर में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रही नेशनल कॉन्फ़्रेंस का प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री फ़ारुक़ अब्दुल्ला करेंगे.

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