कश्मीर पर पाक के प्रस्ताव से भारत नाराज़

सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल श्रीनगर में
Image caption पाकिस्तानी संसद ने यह प्रस्ताव ऐसे समय में पारित किया था जब दिल्ली से एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भारत प्रशासित कश्मीर में हालात का जायज़ा लेने के लिए श्रीनगर पहुँचा हुआ था.

भारत ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट के ज़रिए भारत प्रशासित कश्मीर पर एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दिए जाने पर सख़्त नाराज़गी जताते हुए कहा कि उसे भारत के अंदरूनी मामलों में दख़ल देने का कोई हक़ नहीं है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश ने मंगलवार को एक बयान में कहा, ‘‘हमने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट में जम्मू-कश्मीर पर मंजूर किए गए प्रस्तावों के बारे में खबरें देखी हैं. हम इन प्रस्तावों को ख़ारिज करते हैं.’’

विष्णु प्रकाश ने कहा कि इसकी बजाय पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के अपने ‘अवैध क़ब्ज़े’ वाले हिस्से में मानव अधिकारों के उल्लंघन, संवैधानिक संरक्षण, लोकतंत्र, 'आतंकवाद' और उग्रवाद जैसे मामले हल करने पर ध्यान देना चाहिए.

बातचीत की वकालत

प्रकाश ने कहा कि भारत, पाकिस्तान के साथ अपने तमाम मामलों को बातचीत के ज़रिए हल करने के प्रति वचनबद्ध है, लेकिन उसके लिए यह ज़रूरी है कि पाकिस्तान इस संकल्प को पूरा करे कि वह अपने नियंत्रण वाले भू-भाग को किसी भी तरीक़े से भारत के ख़िलाफ़ ‘आतंकवाद’ के लिए इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं देगा. प्रवक्ता ने कहा, ‘‘भारत, पाकिस्तान के साथ सच्ची भावना से अच्छे पड़ोसी रिश्ते रखने का इच्छुक है.’’

संसद का प्रस्ताव

पाकिस्तानी संसद में सोमवार रात मंजूर किए गए प्रस्ताव में कहा गया था कि कश्मीरी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार के संघर्ष को पाकिस्तान 'नैतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक' समर्थन देना जारी रखेगा.

सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव में कहा गया था, "यह सदन भारतीय क्रूरता की कड़ी निंदा करता है जिसकी वजह से हाल के दिनों में सौ से अधिक कश्मीरी युवक, पुरुष, महिलाएँ और बच्चे शहीद हुए हैं."

इस प्रस्ताव के ज़रिए पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया गया था कि वह भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार हनन के मामले को संयुक्त राष्ट्र सहित सभी अंतरराष्ट्रीय फ़ोरम में उठाए.

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