"सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून ज़रूरी"

कश्मीर
Image caption कश्मीर में कई लोग सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून का विरोध करते हैं.

रक्षा राज्य मंत्री एमएम पल्लम राजू ने दिल्ली में एक प्रेस वार्त्ता में कहा कि कश्मीर में सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून को कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिए.

रक्षा राज्य मंत्री का ये बयान ऐसे वक्त पर आया है जब कश्मीर के ज़मीनी हालात का जायज़ा लेने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वहाँ दौरे पर है.

ग़ौरतलब है कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के ठीक पहले भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा था कि सेना के लिए बना विशेषाधिकार क़ानून निरंकुश नहीं बल्कि सेना को सशक्त बनाने वाला क़ानून है.

पल्लम राजू का कहना था कि कश्मीर की समस्या को सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को संबोधित करना राज्य सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और राज्य में शांति की स्थापना के लिए सरकार को चाहिए कि वो वहाँ की अर्थव्यवस्था में सुधार लाए.

उन्होंने कहा कि "कश्मीर में राज्य सरकार शांति की स्थापना की कोशिश में लगी है और सेना उसी उद्देश्य में सरकार की मदद कर रही है. सेना घुसपैठियों को राज्य में घुसने से रोकने में सफ़ल रही हैं. लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आवासीय क्षेत्रों में सेना की मौजूदगी को कम रखा गया है. सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून सेना के मनोबल को बनाए रखने के लिए ज़रुरी है. ये अधिनियम सेना के लिए सुरक्षा कवच के रुप में काम करता है."

भारत प्रशासित कश्मीर में घुसपैठ के मुद्दे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि "हालांकि पिछले कुछ सालों में क्षेत्र में घुसपैठ में कमी हुई है लेकिन घुसपैठिए अभी भी भारत में तनाव बढ़ाने के उद्देश्य से कश्मीर में घुसने की मंशा रखते हैं. कश्मीर में स्थिति को सामान्य नहीं कहा जा सकता. ऐसे में सशस्त्र बल विशेषाधिकार क़ानून को कमज़ोर करना या उसे कुछ क्षेत्रों से हटाया जाना ठीक नही होगा."

कश्मीर में सेना के ख़िलाफ़ बढ़ते आक्रोश के बारे में उनका कहना था कि "कश्मीर में भारतीय सेना को एक हैवान के रुप में देखा जाता है और इन सब के बीच सेना वहाँ 'बली का बकरा' बन कर रह गई है."

'पाक-चीन रिश्ते मज़बूत'

Image caption सरकार का कहना है कि घुसपैठियों को बाहर रखने के लिए सुरक्षाबलों का कश्मीर में रहना ज़रूरी है.

पाक प्रशासित कश्मीर में चीन के सैनिकों की मौजूदगी को महत्ता न देते हुए रक्षा राज्य मंत्री पल्लम राजू ने कहा कि " इस बात में कोई शक़ नहीं है कि पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है. कोई भी देश अपने बचाव में सेना तैनात कर सकता है. अगर चीन अपनी सेना तैनात करता है तो भारत भी अपने बचाव में ऐसे कदम उठा रहा है."

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को बचाव प्रणाली में सुधार की ज़रुरत है और हम उसकी ओर उचित क़दम उठा रहे हैं.

पिछले महीने एक वरिष्ठ भारतीय सैन्य अधिकारी का चीन दौरा रद्द होने से उठे कूटनीतिक विवाद के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी एक-आध घटना से दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध ख़त्म नहीं हो जाते.

भारत-चीन सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रम पर लगाई गई रोक के बारे में उन्होंने कहा कि हालाँकि दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा को लेकर विवाद ज़रुर है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रम जल्द ही बहाल होगा.

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