उत्तराखंड में बारिश से भारी तबाही

बाढ़ की स्थिति

उत्तराखंड में दो दिनों की भारी बारिश के बाद जगह-जगह से ज़मीन धंसने और पहाड़ दरकने की ख़बरें आ रही हैं. नदियाँ उफ़ान पर हैं और टिहरी बांध में जलस्तर अधिकतम स्तर से बढ़कर 831 मीटर तक पहुँच गया है.

भूस्खलन और मकान धँसने जैसी घटनाओं में मरने वालों की संख्या 65 तक पहुँच गई है.

इससे राज्य में दस हज़ार परिवार प्रभावित हुए हैं और 20 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल चौपट हो गई है.

अधिकारियों का कहना है कि राज्य में 1200 सड़कें ध्वस्त हो गई हैं.

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से पाँच हज़ार करोड़ रुपए की सहायता माँगी है और कहा है कि राज्य को आपदाग्रस्त घोषित किया जाए.

इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मृतकों के परिवारजनों को एक-एक लाख और घायलों को 50 हज़ार तक सहायता देने की घोषणा की है. इससे पहले राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारजनों को एक-एक लाख रुपए देने की घोषणा की थी.

इसके अलावा केंद्र सरकार ने वहाँ बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए सुरक्षा बल के दो सौ कमांडो भेजे हैं.

बुरी स्थिति

अभी बारिश और बाढ़ की वजह से होने वाले नुक़सान का ठीक-ठीक आकलन नहीं लगाया जा सका है क्योंकि बहुत से इलाक़ों से संपर्क टूटा हुआ है.

गंगा, कोसी, अलकनंदा और मंदाकिनी सहित राज्य की अधिकांश नदियों में बाढ़ आ गई है और जगह-जगह से बादल फटने और भूस्खलन की खबरें आ रही हैं.

सबसे ज़्यादा तबाही कुमाँऊ मंडल में हुई है.

अलमोड़ा, सोमेश्वर और नैनीताल में जगह- जगह बादल फटने और भूस्खलन के कारण मकान गिर गए हैं और मलबे में दबने से 38 लोगों की मौत हो गई है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि राहत दल अभी तक मलबे में दबे सभी लोगों को निकाल नहीं सके हैं.

कोसी नदी में उफ़ान जारी है और बड़े पैमाने पर खेत-खलिहान, मकान औऱ सड़कें ध्वस्त हो गई हैं.

हलद्वानी में गोला नदी में आई बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित हैं.

गढ़वाल में उत्तरकाशी में बड़कोट, बनचौरा और पौड़ी के तौल्यों डाडा रिखणीखाल में बादल फटने से भारी नुकसान की सूचना है.वहां भी कई मकान गिर गए हैं.

अलकनंदा और मंदाकिनी ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और तटिय इलाक़ों का कटान जारी है.

हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही है.

मौसम विभाग के अनुसार इसके पहले 1978 में प्रदेश में इतनी विकराल बारिश और बाढ़ की स्थिति आई थी.

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