नगालैंड की आर्थिक नाकेबंदी हटी

असम का एक गांव
Image caption असम का कई पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा विवाद है.

भारत के पूर्वोर्त्तर राज्य असम में स्थानीय संगठनों ने पड़ोसी राज्य नगालैंड की आर्थिक नाकेबंदी एक सप्ताह बाद हटा ली है.

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन यानि आसू के नेतृत्व में असम के कई संगठनों ने नगालैंड की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर 17 सितंबर से नाकेबंदी शुरु की थी.

इससे पहले नगालैंड पुलिस ने असम के गोलाघाट ज़िले के फ़ोलोनगंज क़स्बे में आसू के कुछ नेताओं पर हमला किया था.

आसू के प्रमुख सलाहकार समुज्जल भट्टाचार्य ने बीबीसी को बताया, “नगालैंड सरकार के इस आश्वासन के बाद कि दोषी पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी, हमने नाकेबंदी हटा ली है.”

भट्टाचार्य ने कहा कि उनके संगठन से नगा संस्थाओं ने भी आर्थिक नाकेबंदी हटाने की गुज़ारिश की थी क्योंकि इसकी वजह से नगालैंड में काफ़ी दिक्कतें आ रहीं थीं.

हमला

Image caption समुज्जल भट्टाचार्य का कहना है कि उनसे नगा संगठनों ने भी नाकेबंदी हटाने की मांग की थी.

असम स्टुडेंट्स यूनियन' के नेताओं पर हमला असम-नगालैंड सीमा पर दो महीने तक चले तनाव के बाद हुआ था.

इस दौरान नगा पृथकतावादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड के तथाकथित सहयोग से कई असमिया गांव वालों को नगाओं ने ऊपरी असम के चराईदेव क्षेत्र से बाहर खदेड़ दिया था.

आसू असमिया ग्रामीणों पर हो रहे हमलों का विरोध करती रही है. उन्हें संदेह है कि नगा गुट असम के इन गांवों पर कब्ज़ा करना चाहते हैं. आसू इस घटनाक्रम को ‘ग्रेटर नगालैंड’ के निर्माण की ओर एक क़दम के रूप में देखता है.

पृष्ठभूमि

असम सरकार भी कहती है कि नगाओं ने राज्य के गोलाघाट और सिबसागर ज़िलों में ज़मीन के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा किया हुआ है.

नगालैंड सरकार इस आरोप का खंडन करती रही है.

यहां तक नगालैंड ने प्रशासनिक उप-खंड नुईलैंड का गठन किया है जिसे असम अपना क्षेत्र बताता है.

वर्ष 1985 में मेरापानी में दोनों राज्यों के पुलिस बल इस तरह आपस में भिड़ गए थे जैसे कि दो देशों की सेनाएं भिड़तीं हैं.

वर्ष 1963 में असम के नगा पहाड़ी क्षेत्र को अलग कर नगालैंड राज्य का निर्माण किया गया था. इसके बाद मिज़ोरम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश को भी अलग राज्य का दर्जा दे दिया गया था.

असम का इन सभी राज्यों के साथ सीमा विवाद है.

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