हाथी मरे, मंत्रालय भिड़े

हादसे की तस्वीर
Image caption 1987 से अब तक इस तरह के हादसों में 118 हाथियों की मौत हो चुकी है.

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी इलाके में एक मालगाड़ी की चपेट में आकर मारे गए सात हाथियों की मौत पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने रेल मंत्रालय को आड़े हाथों लिया है.

सात हाथियों की मौत को गंभीरता से लेते हुए जयराम रमेश ने कहा कि वो जल्द ही रेलवे बोर्ड से मिलेंगे और इस तरह के हादसे टालने के लिए उठाए जा रहे कदमों की पड़ताल करेंगे.

गुरुवार को हाथियों का एक झुंड मालगाड़ी की चपेट में आ गया था. झुंड मे शामिल हाथी के दो बच्चे रेलवे ट्रैक पर फंस गए और उन्हें बचाने की कोशिश में सात हाथियों की मौत हो गई.

एफ़आईआर दर्ज हुई

जयराम रमेश ने कहा, ''इस तरह का हादसा पहली बार नहीं हुआ है लेकिन उत्तर-पश्चिम इलाके में जिस संख्या में हाथियों की मौत हुई है ये चिंता का विषय है.''

उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय ने हाथी को राष्ट्रीय संपदा का हिस्सा घोषित किया है. वो हाथियों के लिए राष्ट्रीय संरक्षण प्राधिकरण बनाने की कोशिश में हैं और उनकी सुरक्षा के लिए ‘एलिफेंट टास्क फोर्स’ के सुझावों को लागू करने में जुटी है. ऐसे में इस हादसे को गंभीरता से लिया जाना ज़रूरी है.

पर्यावरण मंत्री इन दिनों एक फ़ोरम में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क की यात्रा पर हैं. रमेश के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल के पर्यावरण मंत्री ए रॉय ने इस हादसे को लेकर रेलवे के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई है.

बढ़ते हादसे

भारत में जंगली हाथियों की संख्या 26,000 के करीब मानी जाती है.

देश के कई हिस्सो में ऐसे इलाके हैं जो परंपरागत रुप से हाथियों के गुज़रने का रास्ता रहे हैं. इन्हें ‘एलिफ़ेंट कॉरिडोर’ कहा जाता है. इन रास्तों पर इंसानी गतिविधियां बढ़ने के कारण इस तरह के हादसे बढ़ते जा रहे हैं.

वन्य जीवों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता अनिमेश बासु का कहना है कि इन रास्तों से गुज़रने वाले ट्रेन चालकों को ये खास हिदायत दी जाती है कि वो ट्रेनों को धीमी गति से चलाएं और रात को इन रास्तों से गुज़रने से परहेज़ करें. हालांकि शायद ही कोई चालक इन नियमों का ध्यान रखता है.

‘वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट’ के अनुसार 1987 से अब तक इस तरह के हादसों में 118 हाथियों की मौत हो चुकी है.

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