शहरयार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित

शहरयार

उर्दू के जाने माने शायर अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान 'शहरयार' को 44वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 2008 के लिए दिया जाएगा.

ये सम्मान पाने वालों में उनके साथ मलयालम के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार ओएनवी कुरुप भी होंगें जिन्हें साल 2007 के लिए 43वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जाएगा.

भारतीय साहित्य जगत में ये सबसे बड़ा पुरस्कार है.

शहरयार से बातचीत सुनिए

शुक्रवार को जाने-माने लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता डॉ. सीताकांत महापात्र की अध्यक्षता में ज्ञानपीठ चयन समिति की बैठक में दोनों साहित्यकारों को पुरस्कृत करने का फ़ैसला किया गया.

ज्ञानपीठ की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि साल 2008 के लिए 44वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाज़े जाने वाले शहरयार का जन्म उत्तर प्रदेश के बरेली में 1936 में हुआ था.

शहरयार उर्दू के चौथे साहित्यकार हैं जिन्हें ज्ञानपीठ सम्मान दिया जाएगा.इससे पहले फ़िराक गोरखपुरी, क़ुर्रतुल-एन-हैदर और अली सरदार जाफ़री को ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है.

74 साल के शहरयार का पूरा नाम कुंवर अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान है, लेकिन इन्हें इनके तख़ल्लुस या उपनाम 'शहरयार' से ही पहचाना जाना जाता है.

1961 में उर्दू में स्नातकोत्तर डिग्री लेने के बाद उन्होंने 1966 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उर्दू के लेक्चरर के तौर पर काम शुरू किया. वह यहीं से उर्दू विभाग के अध्यक्ष के तौर पर सेवानिवृत्त भी हुए.

'उमराव जान' से शोहरत

शहरयार ने गमन और आहिस्ता- आहिस्ता आदि कुछ हिंदी फ़िल्मों में गीत लिखे लेकिन उन्हें सबसे ज़्यादा लोकप्रियता 1981 में बनी फ़िल्म 'उमराव जान' से मिली.

सम्मान मिलने के बाद बीबीसी हिंदी डॉटकॉम की संपादक सलमा ज़ैदी से एक ख़ास बातचीत में शहरयार ने कहा, ''ये मेरी बदक़िस्मती है कि मैं फ़िल्म में अपनी अदबी अहमियत की वजह से गया और अब अदब में मेरा ज़िक्र फ़िल्म के हवाले से किया जाता है.''

शहरयार को उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, दिल्ली उर्दू पुरस्कार और फ़िराक़ सम्मान सहित कई पुरस्कारों से नवाज़ा जा चुका है.

शहरयार की अब तक तक़रीबन दो दर्जन किताबें प्रकाशित हो चुकी है.

कुरुप को भी सम्मान

वर्ष 2007 के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले कुरुप का जन्म 1931 में कोल्लम ज़िले में हुआ. वह समकालीन मलयालम कविता की आवाज़ बने.

मलयालम फ़िल्मो के लिए गीत लिखने के बाद उन्हें काफ़ी लोकप्रियता मिली.

कुरुप ने कहा, "मलयालम को लंबे अंतराल के बाद ये सम्मान मिला है.ये मलयालम कविता का सम्मान है."

ये सम्मान पाने वाले वो मलयालम के दूसरे कवि हैं.

कुरुप के अबतक 20 कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्होंने गद्य लेखन भी किया है.

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