अयोध्या मामलाः 21 साल, 13 बेंच, 18 जज

अयोध्या: मनप्रीत रोमाना /एएफ़पी / गेटी इमेजेज़

अयोध्या में विवादित जमीन के मालिकाना हक के चार मामलों की सुनवाई करने वाली हाईकोर्ट की विशेष पीठ पिछले 21 साल में 13 बार बदल चुकी है.

बेंच में यह बदलाव जजों के रिटायर होने, पदोन्नति या तबादले के कारण करने पड़े.

विवादित धार्मिक स्थल राम जन्म भूमि बाबरी मस्जिद का यह मामला शुरू में फ़ैज़ाबाद के सिविल कोर्ट में चल रहा था. यह मामला स्थानीय स्तर पर ही चल रहा था. अयोध्या – फैजाबाद के बाहर बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी थी.

लेकिन वर्ष 1984 में राम जन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति के आंदोलन और 1986 में विवादित परिसर का ताला खुलने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा.

फिर 1989 में आम चुनाव से पहले विश्व हिंदू परिषद ने विवादित ज़मीन पर राम मंदिर के शिलान्यास की घोषणा करके मामले को और गरमा दिया.

तब राज्य सरकार के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने एक जुलाई 1989 को मामले को फ़ैज़ाबाद की अदालत से हटाकर अपने पास मंगा लिया. तब से यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है.

पहली पूर्ण पीठ

विवाद की सुनवाई के लिए 21 जुलाई 1989 को तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केसी अग्रवाल, जस्टिस यूसी श्रीवास्तव और जस्टिस सैयद हैदर अब्बास रज़ा की पहली विशेष पूर्ण पीठ बनी.

अगले साल 1990 में जस्टिस रज़ा के साथ दो नए जजों जस्टिस एससी माथुर और जस्टिस ब्रजेश कुमार को मिलाकर नई बेंच बनी.

विवादित मस्जिद गिरने के बाद केंद्र सरकार ने जनवरी 1993 में अध्यादेश लाकर मालिकाना हक़ के चारों मामले समाप्त करके सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी कि क्या वहाँ कोई पुराना मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी.

वर्ष 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अपनी राय देने से इनकार कर दिया और मामलों को पुनर्जीवित करते हुए हाईकोर्ट को फ़ैसला करने को कहा.

तब 1994 में जस्टिस एपी मिश्र, जस्टिस सीए रहीम और जस्टिस आईपी वशिष्ठ की नई बेंच बनी.

जस्टिस रहीम के चले जाने के बाद 1996 में जस्टिस एसआर आलम को लेकर चौथी बेंच बनी. सितंबर, 1997 में जस्टिस एपी मिश्र के हटने पर जस्टिस देवकांत त्रिवेदी को मिलाकर पांचवी पीठ बनी.

जनवरी, 1999 में जस्टिस आईपी वशिष्ठ हटे. उनकी जगह जस्टिस जेसी मिश्र को लेकर नई बेंच बनी.

सातवीं बेंच

जुलाई, 2000 में जस्टिस मिश्र चले गए और उनकी जगह जस्टिस भंवर सिंह आए तो सातवीं बेंच बनी.

सितंबर, 2001 में जस्टिस देवकांत त्रिवेदी की जगह जस्टिस सुधीर नारायण आए.

जुलाई, 2003 में फिर नवीं बार बेंच पुनर्गठित हुई और जस्टिस सुधीर नारायण की जगह जस्टिस खेमकरण आ गए.

अगस्त, 2005 में जस्टिस खेमकरण की जगह जस्टिस ओपी श्रीवास्तव आए. जस्टिस श्रीवास्तव को एक साल का सेवा विस्तार मिला फिर भी सुनवाई पूरी नही हुई.

जनवरी, 2007में जस्टिस भंवर सिंह की जगह जस्टिस धर्मवीर शर्मा आए.

सितंबर, 2008 में जस्टिस ओपी श्रीवास्तव की जगह जस्टिस सुधीर अग्रवाल आ गए.

13वीं पूर्ण पीठ

फिर दिसंबर, 2009 में जस्टिस सैयद रफ़त आलम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हो गए. उनके तबादले पर जस्टिस एसयू ख़ान को लेकर 13वीं बार विशेष पूर्ण बनी.

अब वर्तमान बेंच के एक सदस्य जस्टिस धर्मवीर शर्मा एक अक्टूबर को रिटायर होने वाले हैं.

इस तरह 1989 से अब तक कुल 18 हाईकोर्ट जज इस मामले की सुनवाई कर चुके हैं.

विवाद से जुड़े अन्य मामलों को जोड़ा जाए तो यह संख्या कहीं अधिक होगी.

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