कांग्रेस, भाजपा, आरएसएस ने स्वागत किया

अयोध्या

राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले को टालने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में ख़ारिज होने का कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने स्वागत किया है.

उधर इलाहाबाद हाईकोर्ट के विशेष अधिकारी ने बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी को बताया है कि हाईकोर्ट की पीठ इस मामले में अब 30 सितंबर को फ़ैसला सुनाएगी.

कांग्रेस के प्रवक्ता जनार्धन द्विवेदी ने कहा है, "हम इस आदेश का स्वागत करते हैं. हमारी हमेशा राय रही है कि या तो मामला आम सहमति से सुलझाया जाए या फिर न्यायालय के फ़ैसले का इंतज़ार किया जाए और उसका सम्मान किया जाए."

उन्होंने ये भी कहा कि देश में आम राय है कि न्यायालय के फ़ैसले को सभी मानें.

हिंदूवादी संगठनों की राय

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा, "हम इसका स्वागत करते हैं. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले ने साफ़ किया है कि पहले स्पष्ट नहीं था कि निर्णय आएगा या फिर दोबारा सुनवाई होगी. अब हम इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करेंगे."

उन्होंने कहा, "अशांति की कोई आशंका नहीं है. हाई कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी क़ानूनी विकल्प बाक़ी है. हम लोगों से अपील करते हैं कि वे शांति बनाए रखें.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रवक्ता राम माधव ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने वही फ़ैसला लिया है जो उचित था. क्योंकि इसको रोकने की अपील क़ानूनी प्रक्रिया में रुकावट पैदा करने की कोशिश थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट का फ़ैसला न्यायिक प्रक्रिया में एक और क़दम होगा. उसके बाद हम विचार करेंगे कि आगे क्या करना है."

हिंदू महासभा के स्वामी चक्रपाणी ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने देश की भावनाओं को समझा है क्योंकि 1950 से बातचीत की सभी कोशिशें विफल रही थीं. जब दो पक्षों के बीच लड़ाई होती है तो सभी को अदालत के फ़ैसले को शांति से मानना चाहिए."

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