विभिन्न पक्ष, क़ानूनी विशेषज्ञ संतुष्ट

अयोध्या
Image caption अयोध्या विवाद मामला कई वर्षों से कोर्ट में चल रहा है.

अयोध्या विवाद पर फ़ैसला टालने की याचिका ख़ारिज होने के बाद इस मामले से सुने विभिन्न पक्षों, क़ानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

इस मामले से जुड़े एक पक्ष हिंदू महासभा और विश्व हिंदु परिषद ने फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने देश की भावनाओं को समझा है. वहीं सुन्नी वक्फ़ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से बेहद ख़ुश है. हालांकि हाईकोर्ट में फ़ैसला उनके ख़िलाफ़ आने पर कई पक्ष सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला होने की बात भी कर रहे हैं.

महंत धरम दास के वकील और एक वरिष्ठ भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा है, "सभी पक्षों की सुनवाई हुई है. साठ साल पुराना मुकदमा है और आज रास्ता खुल गया है. हम सभी ने कहा था कि निर्णय हो. किसी पार्टी को आपत्ति होगी तो वो सुप्रीम कोर्ट आ सकता है. हमें इस देश के नागरिकों की परिपक्वता पर विश्वास करना चाहिए जिन्हें देश की न्याय प्रक्रिया पर विश्वास है."

'कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करें'

विश्व हिन्दू परिषद् के नेता अशोक सिंघल ने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. सिंघल का कहना है कि विवाद से जुड़े सभी पक्षकारों समेत पूरा देश इस फै़सले का इंतज़ार कर रहा था, ऐसे में फै़सले पर रोक लगाने का ग़लत संदेश जा रहा था.

उनके मुताबिक़ सभी पक्षों के सामने केस हारने पर सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का आज का फै़सला बहुत सही है और स्वागत करने लायक है. सिंघल ने कहा, "अगर फै़सला ख़िलाफ़ आता है तो वो और उनका संगठन इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे."

सिंघल का कहना है कि सभी पक्षों को कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि सरकार को लोगों की भावनाओं का ख़्याल रखते हुए कोई सकारात्मक क़दम उठाना चाहिए.

'सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से बंधे'

वहीं सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा, "अब हाईकोर्ट के लिए रास्ता खुल गया है. फ़ैसला कल आएगा या परसों लेकिन अभी हमें इतना पता है कि एसएलपी रद्द कर दी गई है."

सरकारी वकील ने कहा है, "हम समझौते का स्वागत करेंगे. लेकिन हम अनिश्चितता की स्थिति के पक्ष में नहीं हैं. हम सुप्रीम कोर्ट के 1984 के फ़ैसले से बंधे हुए हैं जिसके तहत विवादित स्थल को सरकार की देखरेख में दिया गया था. साथ ही सरकार से कहा गया था कि जिसके भी पक्ष में फ़ैसला होता है, सरकार ज़मीन उसके सुपुर्द कर, फ़ैसले को लागू करे."

सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के वकील अनूप चौधरी ने कहा, "सुन्नी वक्फ़ बोर्ड इस याचिका के ख़ारिज होने से बहुत ख़ुश है. "

रमेश चंद्र त्रिपाठी की याचिका के बारे में टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जब किसी केस में काफ़ी प्रचार होने की संभावना हो तो लोग किसी भी तर्क के साथ याचिका दायर कर देते हैं.

उल्लेखनीय है कि अयोध्या-बाबरी विवाद पर इलाहबाद हाई कोर्ट को 24 सितंबर को फ़ैसला सुनाना था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में रमेश चंद्र त्रिपाठी ने इस फ़ैसले को टालने की याचिका दायर कर दी थी.

अब इस याचिका के ख़ारिज होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट 30 सितंबर को अयोध्या-बाबरी विवाद पर फ़ैसला सुनाएगा.

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