पूर्व नवाबों को मिलता रहेगा भत्ता

टोंक की जमा मस्जिद
Image caption नवाबों को यह भत्ता ब्रिटिश शासनकाल में 1944 में देना शुरू किया गया था.

राजस्थान के पूर्व नवाबी रियासत टोंक में नवाब ख़ानदान के सदस्य मासिक ख़ानदानी भत्ते की कानूनी जंग जीत गए है.

हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार को पूर्व नवाब ख़ानदान के सदस्यों को मिलने वाले भत्ते को रोकना नहीं चाहिए.

'अंजुमन ख़ानदान-ए-अमीरिया' के पूर्व सचिव अस्मत अली ख़ान कहते हैं, ''यह हमारे लिए एक बड़ी जीत है. इसमें मासिक भत्ते की रकम छोटी है या बड़ी ये महत्वपूर्ण नहीं है. ब्रिटिश राज में शुरू हुआ यह भत्ता हमारे लिए इज़्ज़त और गुज़रे दौर के गौरव को याद दिलाने वाला है ''۔

टोंक में पूर्व नवाब ख़ानदान के ऐसे 570 सदस्य हैं जिनको यह ख़ानदानी भत्ता मिल रहा था. यह भत्ता 1944 में शुरू हुआ था. उस समय बहुत ही कम राशि भत्ते के रूप में मिलती थी.

अस्मत अली ख़ान बताते हैं,''उन्हें महज 13 रुपए मासिक भत्ता मिलता था. मैं तो साल में एक बार ही भत्ता लेने जाता था, क्योंकि यह राशि लेने में ज़्यादा ख़र्च होता था. इसलिए हम साल भर की राशि एक साथ लेते थे.''

भत्ते के लिए जंग

सरकार ने एक बार भत्ते की इस राशि में बढ़ोतरी तो की लेकिन फिर उसे वापस ले लिया और साथ में कुछ शर्तें भी थोप दीं.

अस्मत अली ख़ान ने सरकार के इस क़दम को अदालत में चुनौती दी. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 2006 में सरकार के आदेश को ख़ारिज कर बढ़ोतरी को सही बताया.

इसके ख़िलाफ सरकार फिर हाईकोर्ट चली गई. अब हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को ख़ारिज कर अंजुमन की बात मान ली है.

टोंक की ज़िलाधिकारी प्रमिला सुराना ने बताया कि अदालत के आदेश की प्रति अभी उन्हें नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश का पालन किया जाएगा.

अंजुमन के वकील नितिन जैन ने कहा कि पूर्व नवाब ख़ानदान के सदस्यों को बढ़ी हुई दरों से छह सौ रुपए प्रतिमाह मिलना चाहिए. इस बारे में हमने सरकार के ख़िलाफ अवमानना का मामला दायर कर रखा है.

अभी टोंक के पूर्व नवाब ख़ानदान के सदस्यों को एक सौ रुपए प्रतिमाह का भत्ता मिलता है.

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