बिहार में प्रचार नहीं करेंगे मोदी

नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार (फ़ोइल फ़ोटो)
Image caption नीतीश कुमार भाजपा के साथ सरकार चलाना चाहते हैं लेकिन नरेंद्र मोदी के साथ नहीं दिखना चाहते

अपने सहयोगी दल जनता दल यूनाइडेट के दबाव के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपने दो स्टार प्रचारकों, नरेंद्र मोदी और वरुण गांधी को बिहार न भेजने का निर्णय किया है.

बिहार चुनाव के पहले दो चरणों के लिए प्रचारकों की जो सूची भाजपा ने चुनाव आयोग को भेजी है, उनमें नरेंद्र मोदी और वरुण गांधी का नाम नहीं है.

बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यू) के नेता नीतीश कुमार और पार्टी अध्यक्ष शरद यादव यह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे नहीं चाहते कि नरेंद्र मोदी और वरुण गांधी विधानसभा चुनाव में प्रचार करें.

उन्हें लगता है कि अगर वे चुनाव प्रचार करेंगे तो पार्टी के मुसलमान वोटों पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

हालांकि भाजपा ने सफ़ाई में कहा है कि चूंकि किसी भी भाजपा शासित राज्य के मुख्यमंत्री का नाम प्रचारकों में नहीं है इसलिए नरेंद्र मोदी का भी नाम नहीं है.

छवि का असर

भाजपा ने बिहार में पहले दो चरणों के चुनाव प्रचार करने वाले 40 लोगों की सूची चुनाव आयोग को भेजी है.

Image caption वरुण गांधी के भाषणों की वजह से ख़ासा विवाद पैदा हो चुका है

इस सूची में पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी, वेंकैया नायडू, मुख़्तार अब्बास नक़वी और शाहनवाज़ हुसैन के नाम हैं.

लेकिन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के युवा सांसद वरुण गांधी का नाम नहीं है.

जनता दल (यू) को लगता है कि गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों में नरेंद्र मोदी की कथित भूमिका की वजह से उनकी छवि मुसलमान मतदाताओं को नाराज़ कर सकती है.

इसी तरह वरुण गांधी को वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान मुसलमानों के ख़िलाफ़ दिए गए भाषणों की वजह से पार्टी प्रचार से दूर रखना चाहती है.

जनता दल (यू) ने काफ़ी पहले से ही अपनी सहयोगी पार्टी भाजपा को यह सूचना दे दी थी कि वह इन दोनों नेताओं को चुनाव से दूर रखना चाहती है.

कुछ महीनों पहले भाजपा के एक कार्यक्रम के दौरान जब नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की फ़ोटो एक साथ अख़बारों में प्रकाशित हो गई थी तो सत्तारूढ़ गठबंधन की दोनों पार्टियों के बीच अच्छा ख़ासा तनाव का माहौल बन गया था.

उसी समय नीतीश कुमार की नाराज़गी ने साफ़ कर दिया था कि इस गठबंधन को बनाए रखने के लिए भाजपा को नरेंद्र मोदी को प्रचार से दूर ही रखना होगा.

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